नई दिल्ली. भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने भीमावरम में समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया. जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत खारे पानी के एक्वाकल्चर क्लस्टर की प्रगति की समीक्षा करना और इस क्षेत्र में खारे पानी के एक्वाकल्चर में लगे झींगा उत्पादक किसानों के साथ बातचीत करना था. इस दौरान मछली किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. अभिलक्ष लिखी ने सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की. उन्होंने किसानों की बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए उन्हें धन्यवाद दिया.
उन्होंने कहा कि यह प्रतिक्रिया केंद्र और राज्य सरकार की नीतिगत प्रतिक्रियाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने सक्रिय योजनाओं के माध्यम से 64 लाख टन मछली उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार को बधाई दी. उन्होंने कहा कि भीमावरम क्लस्टर को निरंतर सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिसमें उत्पादन-पूर्व, उत्पादन और उत्पादन-पश्चात चरणों में आने वाली कमियों को दूर करने के लिए केंद्रित कार्रवाई की जाएगी.
बाजार और निर्यात संबंधों को मजबूत करने का निर्देश
उन्होंने रक्षा और अन्य सरकारी संस्थानों के साथ गठजोड़ करके मछली की खपत को बढ़ावा देने पर जोर दिया.
किसानों को भारत और विदेशों में ‘एक्सपोज़र विजिट’ (अध्ययन यात्राओं) के लिए प्रोत्साहित किया.
आइसलैंड के साथ प्रस्तावित त्रिपक्षीय सहयोग सहित ‘संपूर्ण-मछली दृष्टिकोण’ को अपनाने तथा मछली वेस्ट के सही इस्तेमाल बल दिया.
उन्होंने भीमावरम में नई तकनीकों और बेहतर जलीय कृषि पद्धतियों पर सीआईबीए के नेतृत्व में जागरूकता शिविर आयोजित करने का भी आह्वान किया.
एमपीईडीए को निर्देश दिया कि वह बाजार तथा निर्यात संबंधों को मजबूत करे, साथ ही किसानों को सर्टिफिकेशन और पता लगाने की क्षमता के बारे में जागरूक करें.
मूल्य श्रृंखला से जुड़े सभी हितधारकों से आग्रह किया गया कि वे भविष्य में इस क्लस्टर के विकास में सहयोग करें.
आंध्र प्रदेश के विशेष मुख्य सचिव, श्री बी. राजशेखर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मछुआरे भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’ (नीली अर्थव्यवस्था) के केंद्र में हैं और वे सतत विकास तथा निर्यात से होने वाली कमाई को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अब ‘ट्रेसिबिलिटी’ (पता लगाने की क्षमता) और वैश्विक नियमों का पालन करना कोई वैकल्पिक चीज नहीं रह गई है.
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानकों का सख्ती से पालन करने की ज़रूरत पर जोर दिया। आंध्र प्रदेश के विशाल समुद्र तट और समुद्री संसाधनों की संभावनाओं की जानकारी दी.
कहा कि समुद्री शैवाल की खेती और कृत्रिम चट्टानों (आर्टिफिशियल रीफ्स) में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया.
उन्होंने बताया कि निर्यात-उन्मुख विकास और संसाधनों की निरंतरता के लिए इन क्षेत्रों में काफ़ी गुंजाइश है.










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