नई दिल्ली. फिशरीज एक्सपर्ट कहते हैं कि मौसम के मुताबिक मछलियों की देखभाल करना बेहद ही जरूरी है. मछली पालन के काम में ये इसलिए जरूरी है. क्योंकि मछलियां ऐसी जीव होती हैं, जिनके शरीर का तापमान उनके आसपास के पानी के तापमान के साथ बदलता रहता है. ऐसे में अगर मौसम के लिहाज से उनकी देखभाल न की जाए तो फिर उनकी ग्रोथ और उत्पादन प्रभावित होता है. नतीजे में मछली पालक भाई को इससे बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. वहीं बदलते मौसम में पानी के तापमान, ऑक्सीजन के स्तर से मछलियों की पाचन क्रिया पर भी असर पड़ता है. जिससे उनकी सेहत और सुरक्षा प्रभावित होती है.
इसलिए जून के महीने में मछली पालकों को प्रजनक मछलियों की उचित देखभाल करना चाहिए. भारतीय और विदेशी कार्प मछलियों का प्रजनन इसी महीने में शुरू कर देना चाहिए. हैचरी या हॉपा ब्रीडिंग के प्रबंधन एवं संचालन के लिए जिला मत्स्य कार्यालय जाकर विशेषज्ञों से समय-समय पर सलाह लेते रहें.
मछली पालक क्या करें
मछली बीज संचयन से पहले तालाब की तैयारी जैसे-जलीय खरपतवार की निकासी, जलीय कीटों तथा अवांछित मछलियों का उन्मूलन कर लें.
जून के महीने में हैचरियों से स्पॉन प्राप्त कर नर्सरी तालाबों में संचयन करें.
ग्रो आउट तालाब में इयरलिंग मछली बीज संचयन (100 ग्राम का बीज) 2000 प्रति एकड़ और (50 ग्राम का बीज) 4000 प्रति एकड़ की दर से तालाब में तैयार कर डालें.
मछली बीज परिवहन का काम हमेशा रात में या 10 बजे से से पहले कर लें.
तालाब में मछलियों को संक्रमित होने से बचाने के लिए 30 दिन पर 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से पोटाशियम परमेंगनेट एवं 20 किलोग्राम नमक को पानी में घोलकर छिड़काव करते रहें.
मौसम खराब रहने यानी अत्यधिक गर्मी, आद्रता, वर्षापात की स्थिति में भोजन का प्रयोग आधा कर दें.
अत्याधिक गर्मी एवं उमस भरा मौसम रहने पर वर्षापात की संभावना रहती है, ऐसी स्थिति में तालाब में घुलनशील ऑक्सीजन की कमी हो जाती है एवं मछलियाँ तालाब के ऊपरी सतह पर आ कर मरने लगती हैं.
ऐसे मौसम में किसान पानी में घुलनशील ऑक्सीजन बढ़ाने वाली दवा 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 15 दिनों के अंतराल पर सुखा छिड़काव करें.
वहीं सुबह और शाम को 4-4 घंटे ऐरेटर चलाएं या पंप से तालाब के पानी को तालाब मे ही गिरायें.
प्रजनक मछली को हैचरी में अंडा देने के पश्चात् 1 से 4 मिलीग्राम प्रति लीटर की दर से पोटेशियम परमेंगनेट डालें.
इसके घोल में 1 मिनट तक या 2 प्रतिशत नमक के घोल में उपचारित करने के बाद तालाब में डालना चाहिए. ऐसा करने से प्रजनक मछली में संक्रमण की संभावना कम हो जाती है.
तालाब के पानी के रंग अत्यधिक हरा या हल्का लाल होने पर चूना एंव रासायनिक खाद का प्रयोग बंद कर दें.
वहीं 800 ग्राम कॉपर सल्फेट या 250 ग्राम एट्राजीन (50% W/W) का छिड़काव प्रति एकड़ की दर से धूप रहने पर करें.













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