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Poultry Farm: गर्मी में मुर्गों को भरपूर पिलाएं पानी, कम पानी पिलाने से हो सकता है नुकसान

बेरोजगारी की दर कम करने और रोजगार के नए अवसर प्राप्त करने के लिए सरकार योजना लेकर आई है.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. ब्रॉयलर मुर्गों से होने वाले मीट का उत्पादन देश में सबसे ज्यादा है. आंकड़ों के मुताबिक तकरीबन 50 लाख टन से ज्यादा इसका उत्पादन होता है. वहीं इसकी डिमांड भी अच्छी खासी रहती है. मीट खाने वालों में ज्यादा लोग चिकन ही खाना पसंद करते हैं. वहीं शादी ब्याह से लेकर घर में खूब चिकन खाया जाता है. यहां ये भी जानते चलें कि इस मीट का उत्पादन करने के लिए ब्रॉयलर मुर्गों को पाला जाता है. ब्रॉयलर मुर्गे फीड खाते हैं और 40 से 50 दिन के अंदर तैयार हो जाते हैं. फिर उन्हें पोल्ट्री कारोबारी चिकन शॉप पर बेचकर कमाई करते हैं.

ब्रॉयलर मुर्गों को जब पाला जाता है तो उसमें बहुत सी बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है. जैसे उन्हें फीड का कितना देना है. पानी कितना पिलाना है. मुर्गों को एक तय समय लाइट की भी जरूरत होती है. ऐसे बहुत सी चीजें हैं, जिनका ध्यान देना बेहद जरूरी है. तभी मुर्गों का वजन सामान्य तरीके से बढ़ता है. उनकी ग्रोथ अच्छी होती है और ज्यादा से ज्यादा मीट का उत्पादन होता है. जिससे पोल्ट्री फार्मर को अच्छी कमाई करने का मौका मिलता है. आपको बता दें कि इन दिनों गर्मी है. ऐसे में पानी का खास ख्याल रखना होता है.

कब कितना पानी देना चाहिए
अगर आप पोल्ट्री फार्मिंग के काम में नए हैं तो हो सकता है कि आपको ये न पता हो कि एक मुर्गे को दिन भर में कितने पानी की जरूरत होती है.

आपको बता दें कि ब्रॉयलर मुर्गों को जब पाला जाता है तो पहले वो चूजे की शक्ल में होते हैं. शुरुआती हफ्ते में 50 से 100 मिलीलीटर प्रति दिन चूजे को पानी दिया जाता है.

वहीं दूसरे हफ्ते में 150 से 250 मिलीलीटर तक पानी चूजे आसानी से पी जाते हैं.

बात अगर तीसरे हफ्ते की करें तो 300 से 500 मिलीलीटर पानी प्रति बर्ड देना बेहद ही जरूरी होता है.

इसी तरीके से चौथे हफ्ते में 600 से 800 मिलीलीटर पानी एक बर्ड को कम से कम चाहिए ही होता है.

वहीं अगर बर्ड पांचवें और छठे सप्ताह में प्रवेश कर जाता है, तब 1 से 2 लीटर पानी प्रति बर्ड को देना जरूरी है.

निष्कर्ष
आपको यहां ये भी बताते चलें कि मुर्गों को पानी की जरूरत कम ज्यादा भी हो सकती है. अगर आप इस काम में नए हैं तो एक्सपर्ट से भी सलाह ले सकते हैं. जबकि अनुभवी पोल्ट्री फार्मर्स आपको इस बारे में भी अच्छी तरह से जानकारी दे सकते हैं.

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