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मछली पालन

PMMSY के तहत हरियाणा में फिशरीज सेक्टर हुआ मजबूत

यहां मानसून जून से सितम्बर तक चलता है. औसत वर्षा करीब 57 सेमी. होती है.
मछली पालन की प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) एक ऐसी योजना है, जिसके जरिए किसानों की इनकम को बढ़ाने का काम सरकार की तरफ से किया जा रहा है. इस योजना के तहत देशभर में कई ऐसे काम किए गए हैं, जिससे फिशरीज सेक्टर मजबूत हुआ है और मछली पालन के जरिए किसानों को फायदा हुआ है. सरकार किसानों की इनकम को बढ़ाना चाहती है, इसलिए इस योजना के तहत हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं. बात कर हरियाणा की है करें तो योजना के तहत हरियाणा में 760.88 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है.

आंकड़ों के मुताबिक इसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 262.17 करोड़ रुपये का है. गौरतलब है कि अंतर्देशीय मछली पालन की क्षमता को बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कुल 79.47 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिसके नतीजे में 456 आरएएस और बायोफ्लॉक प्रणालियां स्थापित की गई हैं.

तालाबों के लिए 176 करोड़ होंगे खर्च
बता दें कि अब तक, 176.32 करोड़ रुपये की कुल लागत से 3,766 हेक्टेयर के तालाब, 2,204 हेक्टेयर के खारे और क्षारीय जल क्षेत्र के लिए परियोजनाएं निर्धारित की गई हैं.

इसके अलावा राज्य में मछली पालन के विकास को बढ़ावा देने के लिए 98.90 करोड़ रुपये की लागत से एक एकीकृत एक्वापार्क को मंजूरी दी गई है.

सिर्फ सिरसा में 110 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत एक्वापार्क की स्थापना की घोषणा की गई है.

साथ ही कटाई के बाद की प्रक्रिया और मूल्यवर्धन को मजबूत करने के लिए शीत भंडारण अवसंरचना के विकास की भी घोषणा की गई है.

राज्य सरकार मत्स्य पालन क्लस्टर को और अधिक मजबूत बनाने के लिए केंद्र के साथ मिलकर हर एक पहलू पर काम करेगी.

बता दें कि झींगा भारत का प्रमुख समुद्री खाद्य निर्यात बना हुआ है, और 2024-25 के दौरान देश के समुद्री उत्पादों के निर्यात में जमे (फ्रोजन) झींगे का मूल्य लगभग 69 प्रतिशत रहा.

पिछले एक दशक में भारत के समुद्री उत्पादों का निर्यात लगभग दोगुना हो गया है, जो 2013-14 में 30,213 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 62,408 करोड़ रुपये हो गया है. इसमें मुख्य योगदान 43,334 करोड़ रुपये मूल्य के झींगे के निर्यात का रहा है.

निष्कर्ष
गौरतलब है कि भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र को लगभग 658 प्रोसेसिंग प्लांटों, 532 पूर्व-प्रोसेसिंग यूनिटों और ताजी, ठंडी, जीवित, सूखी और नमकीन मछलियों के लिए व्यापक प्रबंधन केंद्रों के नेटवर्क के साथ-साथ देश भर में 734 से अधिक कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं से मदद मिलती है. जिससे मछली पालकों को फायदा हो रहा है.

Written by
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