नई दिल्ली. पशुपालन में पशुपालकों का फायदा तब दोगुना हो जाता है, जब पशु बच्चे को जन्म देता है. यदि आप डेयरी पशुओं को पाल रहे हैं और बच्चा फीमेल है तो फिर आगे चलकर वो दुधारू पशु बन जाएगा. जबकि मेल है तो उसे मीट के लिए बेचकर भी कमाई कर सकते हैं. ठीक इसी तरह से बकरी पालन में भी बकरी के बच्चों की डिमांड ज्यादा है. दूध और मीट दोनों के लिए इसकी अच्छी कीमत मिल जाती है. ऐसे भी बकरियों की बहुत सी नस्लें एक साथ दो या कुछ नस्लें तीन तक बच्चों को जन्म देती हैं. इससे बकरी पालक को अच्छा मुनाफा होता है.
बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) के एक्सपर्ट ने लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को बताया कि बकरी पालन में बकरी के बच्चे का सही तरह से जन्म कराने के लिए बकरी पालकों को गर्भवती बकरी की सही से देखभाल करनी चाहिए. क्योंकि कई बार बकरी पालक देखभाल में लापरवाही कर जाते हैं. इसके चलते बकरी को दिक्कत होती है और बकरी का बच्चा जन्म से पहले ही खराब हो जाता है. जबकि पैदा भी हो जाए तो भी बच नहीं पाता है.
बकरी पालक जरूर करें ये काम
एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि बकरी जब बच्चा देने वाली हो उसके 15 दिन पहले उसे झुंड से अलग कर देना चाहिए
बकरी को ऐसी जगह पर रखें जो जगह साफ और सूखी हो गीली जगह उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है.
यदि आप बच्चे को तंदुरुस्त देखना चाहते हैं तो इसके लिए जरूरी है कि बकरी के फीड में दाना मिश्रण बढ़ा दें.
दाना मिश्रण खाने से बकरियों को ताकत मिलती है. उनके पेट में पल रहे बच्चों को भी से फायदा होता है.
एक बात का ध्यान रखें कि बकरियों को कभी भी खराब रास्ते पर ना लेकर जाएं. यह बहुत ही नुकसानदेह साबित हो सकता है.
कई बार ऐसा होता है कि बकरियां झुंड में रहती हैं तो एक दूसरे जानवरों से लड़ने लग जाती हैं.
ऐसे में गर्भवती बकरी को अगर चोट लग गई तो इससे नुकसान बच्चे को होता है. इसलिए जरूरी है उन्हें लड़ने से बचाए और सबसे जरूरी है कि उन्हें अलग रख दें.
अगर गर्भवती बकरियों के साथ आपने ये काम भी कर लिए तो काफी हद तक स्वस्थ बच्चे का जन्म करा पाएंगे और इससे आपको आगे चलकर फायदा होगा.
निष्कर्ष
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बकरी पालन में सबसे ज्यादा मृत्युदर बकरी के बच्चों में ही देखी जाती है. कई बार बकरी पालकों की लापरवाही से ऐसा होता है. उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं होती है कि आखिर कब क्या करना है. जिससे बकरी पालन में उन्हें नुकसान होता है.











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