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DDGS है डेयरी पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए बेहतरीन विकल्प

कार्यशाला में बोलते एक्सपर्ट.

नई दिल्ली. डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (DDGS) इथेनॉल उत्पादन यानि मक्का और अन्य अनाजों के बाद बचा हुआ हाई प्रोटीन और पोषक तत्व से भरपूर चारा है, जिसका पशु आहार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. जबकि ये सस्ता और आसानी से पचने वाला भी है. साथ ही इससे दूध उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है. इसकी को देखते हुए एनडीडीबी ने आनंद स्थित अपने मुख्यालय में “पशुधन चारे के घटक के रूप में गुणवत्तापूर्ण डिस्टिलर्स ड्राइड ग्रेन्स विद सॉल्युबल्स (DDGS) का उत्पादन और उपयोग” विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की. जिसमें बायोएथेनॉल और पशुधन चारा क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया गया.

इस दौरान NDDB के SGM (PE) डॉ. आरओ गुप्ता ने बढ़ती मांग और सीमित पारंपरिक संसाधनों के बीच DDGS को एक किफायती और पोषक तत्वों से भरपूर चारे के विकल्प के रूप में रेखांकित किया. तकनीकी सत्रों के दौरान विशेषज्ञों ने पशुधन चारे के एक टिकाऊ घटक के रूप में इसकी प्रबल क्षमता पर जोर दिया.

उत्पादकता की समस्या से जूझ रहा डेयरी सेक्टर
NDDB के ग्रुप हेड (पशु पोषण) डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि कंपाउंड फीड उद्योग में वृद्धि के बावजूद, अपर्याप्त और असंगत गुणवत्ता वाले चारे के कारण भारत का डेयरी क्षेत्र कम उत्पादकता की समस्या का सामना कर रहा है.

उन्होंने DDGS को एथेनॉल के एक मूल्यवान उप-उत्पाद के रूप में रेखांकित किया, जिसमें अच्छी मात्रा में ऊर्जा और प्रोटीन होता है.

वर्तमान में इसका उपयोग चारे में 4–7% की दर से किया जा रहा है, लेकिन इसमें और अधिक मात्रा में शामिल करने की गुंजाइश है.

हालांकि, उन्होंने सल्फेट के स्तर और एफ्लाटॉक्सिन संदूषण जैसी चिंताओं के कारण सख्त गुणवत्ता नियंत्रण की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, और ओजोनेशन तथा Aflasafe जैसे समाधानों को रेखांकित किया.

MIV बायो सॉल्यूशंस के डॉ. विपुल गोहेल ने DDGS उत्पादन में प्रमुख नियंत्रण बिंदुओं पर जोर दिया, और पोषक तत्वों की हानि पर ‘मैलार्ड प्रतिक्रिया’ (Maillard reaction) के प्रभाव तथा अनुकूलित प्रसंस्करण और फीडस्टॉक की गुणवत्ता के महत्व को रेखांकित किया.

उन्होंने एफ्लाटॉक्सिन संदूषण को कम करने के लिए एंजाइम-आधारित दृष्टिकोणों पर भी प्रकाश डाला. जाने-माने परामर्शदाता पशु पोषण विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप महाजन ने बताया कि DDGS की उपलब्धता बढ़ रही है.

उन्होंने कहा कि इसकी गुणवत्ता में अभी भी भिन्नता बनी हुई है. इसलिए माइकोटॉक्सिन और अवशेषों जैसे संदूषकों की नियमित जाँच और कड़ी निगरानी की आवश्यकता है.

उन्होंने इसके सुरक्षित और कुशल उपयोग के लिए सुदृढ़ गुणवत्ता नियंत्रण पर जोर दिया.
निष्कर्ष के तौर पर, NDDB ने एक टिकाऊ चारा क्षेत्र के निर्माण हेतु तकनीकी सहायता, नवाचार और साझेदारियों के माध्यम से DDGS के सुरक्षित और कुशल उपयोग को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया.

Written by
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