नई दिल्ली. देश ने सीफूड एक्सपोर्ट में बहुत ज्यादा बढ़त हासिल कर ली है. दस साल पहले के यानि 2013-14 के रिकॉर्ड को देखा जाए तो देश में सीफूड एक्सपोर्ट 30 हजार 213 करोड़ रुपये का था, जो बढ़कर 2024-25 में 62 हजार 408 करोड़ रुपये हो गया है. हालांकि सरकार की मंशा है कि इसे 1 लाख करोड़ रुपए का किया जाए. इसके लिए मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्य पालन विभाग ने नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में “सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026” का आयोजन किया था. जहां केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने निर्यातकों से सीधे बातचीत की.
उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, उन्होंने बताया कि भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका के अलावा अन्य बाजारों में बेहतर प्रदर्शन रहा है. बाजार और उत्पाद विविधीकरण की निरंतर आवश्यकता पर जोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कड़े नियामकीय अनुपालन के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें एंटीबायोटिक प्रतिबंधों का पालन और ट्रेसबिलिटी प्रणाली को मजबूत करना शामिल है.
मंत्री ने वैकल्पिक बाजारों की खोज पर बल दिया
विशेष आर्थिक क्षेत्र(ईईजेड) नियमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस ढांचे को एक्सेस पास के माध्यम से लागू किया जा रहा है.
जिसमें सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि समावेशी विकास को बढ़ावा मिल सके.
उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ईईजेड और खुले समुद्र से टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं को रेखांकित किया.
साथ ही बेहतर ऑनबोर्ड हैंडलिंग, मजबूत कोल्ड चेन अवसंरचना, बेहतर पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन तथा फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और निर्यात तंत्र को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक बाजारों की खोज पर बल दिया.
निर्यातकों से 1 लाख करोड़ के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में कार्य करने और ओपन मार्केट दृष्टिकोण अपनाने का भी आग्रह किया गया.
उन्होंने आश्वासन दिया कि ईआईसी, एनसीडीसी, नाबार्ड और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय जैसी संस्थाओं का पूरा सहयोग मिलेगा.
उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आयोजित निवेशक बैठक का भी उल्लेख किया, जिसके परिणामस्वरूप मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए निवेश हुए हैं.
विशेष रूप से समुद्री केज कल्चर, मोती की खेती और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के क्षेत्रों में निवेश में तेजी आई है.
झींगा भारत का प्रमुख समुद्री खाद्य निर्यात बना हुआ है, और 2024-25 के दौरान देश के समुद्री उत्पादों के निर्यात में जमे (फ्रोजन) झींगे का मूल्य लगभग 69 प्रतिशत रहा.
निष्कर्ष
पिछले एक दशक में भारत के समुद्री उत्पादों का निर्यात लगभग दोगुना हो गया है, जो 2013-14 में 30,213 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 62,408 करोड़ रुपये हो गया है. इसमें मुख्य योगदान 43,334 करोड़ रुपये मूल्य के झींगे के निर्यात का रहा है.











Leave a comment