नई दिल्ली. पशुपालन के काम में चारे का सही भंडारण यानी स्टोरेज करना भी बहुत जरूरी है. ये न सिर्फ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति के लिए भी जरूरी होता है. अगर आप सही तकनीक अपनाते हैं तो पशुओं के लिए साल भर पौष्टिक चारा उपलब्ध रहता है. जबकि गलत तकनीक अपनाने की वजह से पशुओं के लिए चारे की कमी हो सकती है और अगर चारे की कमी हो गई तो फिर इससे दूध उत्पादन प्रभावित होगा. जबकि पशुओं की सेहत भी खराब हो सकती है. वहीं आपको पशुपालन के काम में नुकसान भी उठाना पड़ जाएगा.
पशुपालन के एक्सपर्ट कहते हैं कि सही चारा तकनीक अपनाने से साल भर पशुओं के लिए चारा उपलब्ध रहता है. जब आपके पास चारा उपलब्ध रहेगा तो ऐसे समय में जब चारे की कमी होती है तो बाजार से महंगे दाम पर चारा नहीं खरीदना होगा. जिससे आर्थिक तौर पर आपको फायदा मिलना तय है.
क्या तरीका अपनाएं, जानें यहां
पशुओं के लिए सूखा चारा अगर आप स्टोरेज कर रहे हैं तो वो पूरी तरह से सूखा होना चाहिए. अगर चारा गीला हुआ तो वो खराब हो सकता है.
इसलिए चारे को ऐसी जगह पर रखें जहां पर पानी आने का खतरा न हो. एक्सपर्ट कहते हैं कि चारे को हमेशा ऊंची जगह पर रखना चाहिए.
बारिश आदि से बचाने के लिए चारे को तिरपाल वगैरह से ढक दें. सबसे अच्छा तरीका यह है कि एक स्टोर रूम बनाया जाए. जहां पर चारा रखा जाए.
चारे के लिए हवादार मौसम भी जरूरी होता है. भले ही चारा सूखा हो लेकिन उसे हवा लगती रहना चाहिए.
पशुओं के लिए रखे गए चारे को कीड़े आदि से बचाना चाहिए. चूहे वगैरह से भी बचाना चाहिए. इसके लिए आप तमाम उपाय अपना सकते हैं.
जब आपके पास नया चारा उपलब्ध हो जाए तो उसे न खिलाए पहले जो रखा हुआ चारा है उसे खिलाएं ताकि उसका सही से इस्तेमाल हो जाए.
वहीं कई बार नया चारा पशुओं को नुकसान भी कर जाता है. एक्सपर्ट पशुओं को गेहूं की नई तूड़ी खिलाने से मना करते हैं.
हरा चारा पशुओं के लिए सालभर उपलब्ध नहीं रहता है, लेकिन इसकी जरूरत सालभर रहती है. इसलिए साइलेज बनाया जा सकता है.
साइलेज से वो तमाम पौष्टिक गुण जिसकी जरूरत हरे चारे से पूरी होती है, वो पशुओं को मिल जाती है.
निष्कर्ष
यदि आप पशुओं की अच्छी सेहत चाहते हैं और उसके उत्पादन से फायदा कमाना चाहते हैं तो सही तरह से चारा प्रबंधन करें.










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