नई दिल्ली. बिहार में मोबाइल वेटनरी यूनिट पशुपालकों के लिए राहत का बड़ा जरिया बनती जा रही है. समय पर इलाज मिलने से जहां मवेशियों की जान बच रही है, वहीं पशुपालकों का भरोसा भी मजबूत हो रहा है. बिहार के तकरीबन सभी जिले के ग्रामीण इलाकों में पशुओं के इलाज को आसान बनाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा सभी प्रखंडों में पशु मोबाइल वैन का संचालन किया जा रहा है. ये वैन रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन गांवों में जाकर शिविर लगाकर पशुओं का उपचार कर रही हैं. इससे पशुपालकों को सीधे तौर पर फायदा हो रहा है. इलाज पर कम खर्च होने से पशुपालन की लागत भी कम हो रही है.
बात बक्सर जिले के मसहिंयां गांव की करें तो यहां के निवासी पशुपालक अरविंद कुमार सिंह की करीब 50 हजार रुपये मूल्य की गाय अचानक गंभीर रूप से बीमार होकर जमीन पर गिर पड़ी. हालत इतनी नाजुक थी कि परिवार के लोगों ने उसके जीवित बचने की उम्मीद छोड़ दी थी. इसी बीच किसी ग्रामीण के सुझाव पर पशुपालक ने टोल फ्री नंबर 1962 पर मोबाइल वेटनरी यूनिट को सूचना दी। सूचना मिलते ही डा. अरविंद कुमार यादव, कम्पाउंडर अनिल कुमार व कर्मी अजीत कुमार की टीम मौके पर पहुंची और तत्काल उपचार शुरू किया.
इस तरह मिल रहा है इलाज
लगातार एक सप्ताह तक चले समुचित इलाज के बाद गाय पूरी तरह स्वस्थ हो गई। गाय के ठीक होते ही परिवार के चेहरे पर खुशी लौट आई.
इसी प्रकार मसहिंयां के ही अन्य पशुपालक अरविंद कुमार, बैदा गांव की मीरा देवी, बसंतपुर के सुखारी चौधरी तथा पांडेयपुर के आशुतोष कुमार के मवेशियों की तबीयत खराब होने पर भी टीम ने त्वरित पहुंचकर इलाज किया.
यूनिट के चिकित्सक ने बताया कि मोबाइल वेटनरी यूनिट में 48 प्रकार की आवश्यक दवाइयां उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग आपातकालीन स्थिति में किया जाता है.
जिले के सभी प्रखंडों में इस सेवा के सक्रिय होने से अब पशुपालकों को भटकना नहीं पड़ता और समय पर उपचार मिल रहा है.
पशुपालकों ने बताया कि यह यूनिट उनके पशुओं के लिए किसी जीवनदायिनी से कम नहीं है, जो समय पर पहुंचकर बेजुबान पशुओं को नया जीवन देने का काम कर रही है.
डीएएचओ डॉ. रमेश कुमार ने समीक्षा बैठक कर सभी यूनिट को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है कि सभी मोबाइल वैन सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक सक्रिय रहेंगे, लेकिन इमरजेंसी सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी.
उन्होंने कहा कि 1962 नंबर पर आने वाले किसी भी कॉल को नजरअंदाज नहीं किया जाए. इलाज सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा.
सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक विशेष रूप से इमरजेंसी मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी.
इसके बाद निर्धारित रोस्टर के अनुसार संबंधित प्रखंडों में गांव-गांव जाकर शिविर लगाए जाएंगे.
डीएएचओ ने निर्देश दिया कि शिविर संचालन के दौरान भी इमरजेंसी मामलों पर नजर बनाए रखना जरूरी है.
यदि किसी पशु में गंभीर या नई बीमारी के लक्षण मिलते हैं तो इसकी सूचना तत्काल जिला मुख्यालय को दी जाए, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें.
बैठक में जिला समन्वयक सौरभकुमार को मोबाइल वैन के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने और प्रतिदिन की रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया.











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