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Dairy News: प्रदेश सरकार खरीदेगी भरपूर मात्रा में दूध, ​डेयरी किसानों को मिलेगा अच्छा दाम

The revised NPDD will give an impetus to the dairy sector by creating infrastructure for milk procurement
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश सरकार देश में राज्य को दूध उत्पादन में नंबर वन बनाना चाहती है. 9 फीसद हो रहे दूध उत्पादन को 20 परसेंट तक ले जाना चाहती है. इसलिए इस दिशा में कई काम सरकार की तरफ से किए जा रहे हैं. कई योजनाओं को भी राज्य में लागू किया गया है. जिसका फायदा भी मिल रहा है. वहीं राज्य को मिल्क कैपिटल बनाने की दिशा में काम कर रहे सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों की आमदनी में वृद्धि करने के लिए हम मिशन मोड पर काम कर रहे हैं. प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है.

उन्होंने कहा कि हम अपने प्रयासों से मध्य प्रदेश को देश का मिल्क कैपिटल बनाकर रहेंगे. सरकार पशुपालकों को दूध का समुचित दाम दिलाएगी और दूध भी खरीदेगी. उन्होंने कहा कि प्रदेश को मिल्क कैपिटल बनाने में ग्वालियर बड़ी भूमिका निभाएगा. डॉ. यादव सोमवार को ग्वालियर में राज्य स्तरीय पशुपालक और दूध उत्पादक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए.

दुग्ध उत्पादन बढ़ाने हर ब्लॉक में एक वृंदावन ग्राम
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि पशुपालक प्रदेश की आर्थिक समृद्धि का प्रमुख आधार हैं.

किसान कल्याण वर्ष में हमारी सरकार पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के समग्र कल्याण में भी कोई कसर नहीं रखेगी.

उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर ब्लॉक में एक-एक वृंदावन ग्राम बनाया जा रहा है, जिससे दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा मिले.

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक एवं पशुपालक सम्मेलन की शुरुआत गो माता का पूजन कर की.

इसके उपरांत पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा वृन्दावन ग्राम थीम पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया.

पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने कहा कि प्रदेश में पहली बार पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों का इतना वृहद समागम हुआ है. यह समागम डेयरी सेक्टर के विकास में मील का पत्थर साबित होगा.

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भी प्रदेश में पशुपालन और डेयरी उद्यमिता को एक लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक से जुड़े ‘रोजगार सूजन मॉडल’ के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध होकर काम कर रही है.

उन्होंने बताया कि पहले प्रदेश में 9 लाख लीटर प्रतिदिन कलेक्शन होता था. इसे बढ़ाया गया है और इसे औ ज्यादा बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है.

Written by
Livestock Animal News Team

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