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Dairy: डेयरी सेक्टर में हर साल 6.82 फीसद की तेजी से बढ़ रहा है लद्दाख

भैंस को दिन में दो-तीन बार नहलाना चाहिए.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. पिछले दिनों लद्दाख में एनडीडीबी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने डेयरी सेक्टर को किसानों की समृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रमुख माध्यम बताया. उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र देश के 10 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका से जुड़ा है, जिसमें महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और पशुपालन को मजबूत करने से महिला सशक्तिकरण को भी गति मिलती है. उन्होंने लद्दाख में विभिन्न डेयरी परियोजनाओं के शुभारंभ एवं कारगिल में नए डेयरी प्लांट के शिलान्यास को अहम बताया.

इन कामों को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि इससे पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा. कहा कि पीएम की पहल से अलग मंत्रालय बनने के बाद भारत विश्वभर में दूध उत्पादन में एक ऐतिहासिक मुकाम पर पहुंचा है. बात कर लद्दाख की ही करें तो यहां दूध सेक्टर में प्रतिवर्ष 6.82 फीसद की वृद्धि हो रही है जिससे स्थानीय किसान सशक्त हो रहे हैं.

उत्पादक बढ़ाने में काम आया राष्ट्रीय पशुधन मिशन
साथ ही, एनपीडीडी और भारत सरकार ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन एवं चारा विकास (Feed and Fodder Development) जैसी योजनाओं के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं.

उन्होंने ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन पर जोर देते हुए कहा कि असंगठित दुग्ध उत्पादकों को सहकारी ढांचे से जोड़ना आवश्यक है, जिससे उन्हें उचित मूल्य, बाजार तक पहुंच और बेहतर आय सुनिश्चित हो सके.

उन्होंने लद्दाख के विकास के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग देती रहेगी.

एनडीडीबी अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि ये काम लद्दाख में एक सहकारिता-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी.

कहा कि अब डेयरी क्षेत्र में पारदर्शिता और किसान-केंद्रित विकास को अभूतपूर्व गति मिली है.

लद्दाख में डेयरी विकास की इस यात्रा में वर्ष 2023 एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जब एनडीडीबी ने यहां के परिचालन की कमान संभाली.

एनडीडीबी के प्रयासों से अल्प समय में ही लेह डेयरी प्लांट का पुनरुद्धार कर इसे पुन: क्रियाशील बनाया गया.

आज यह नेटवर्क 28 गांवों के लगभग 1,700 किसानों से जुड़कर 7,000 लीटर दैनिक दुग्ध संग्रहण तक पहुंच गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ सशस्त्र बलों को भी उच्च गुणवत्ता वाले दूध की आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है.

कहा कि लद्दाख की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए मोबाइल कंटेनराइज्ड मिल्क कूलर और टेस्टिंग लैब गेम-चेंजर साबित होंगे.

Written by
Livestock Animal News Team

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