नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य स्तरीय पशुपालक और दूध उत्पादक सम्मेलन में कहा है कि हम राज्य में पशुपालन और डेयरी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ के रूप में तैयार कर रहे हैं. दूध व्यवसाय हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. यह सभी पशुपालकों के आर्थिक स्वावलंबन का मजबूत माध्यम है. हम प्रदेश के हर किसान और पशुपालक को समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. सरकार डेयरी क्षेत्र में नवाचार करते हुए निवेश भी बढ़ाने के लिए सभी प्रयास कर रही है. निवेश आयेगा, तो इस सेक्टर में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
हम हमारे युवाओं को गांवों में ही रोजगार मुहैया कराने के लिए सभी बेहतर संभावनाओं पर फोकस कर रहे हैं. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश दुग्ध उत्पादन में भी अग्रणी राज्य बने, यही हमारा लक्ष्य है. पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों की आमदनी में वृद्धि करने के लिए हम मिशन मोड पर काम कर रहे हैं.
राज्य को मिल्क् कैपिटल बनाकर रहेंगे
प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार हर जरूरी कदम उठा रही है. हम अपने प्रयासों से मध्य प्रदेश को देश का मिल्क कैपिटल बनाकर रहेंगे.
इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल, बेहतर प्रबंधन और सभी पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को मिल्क केपिटल बनाने में ग्वालियर बड़ी भूमिका निभाएगा.
इस अवसर पर क्षेत्रीय पशुपालकों को अपने पशुधन के स्वास्थ्य एवं उपचार की स्थानीय स्तर पर सुविधा मुहैया कराने के लिए ग्वालियर में पशुओं का केयर एंड वेलनेस सेंटर खोलने की बात कही.
साथ ही ग्वालियर के पशु स्वास्थ्य एवं उपचार केन्द्र का उन्नयन करने तथा डबरा में नया पशु चिकित्सालय खोलने की घोषणा की.
सम्मेलन के दौरान प्रदेश में पशुपालकों को सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रोत्साहन की सफलता की कहानियों तथा पशुधन विकास पर केन्द्रित वीडियो फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पशुपालक प्रदेश की आर्थिक समृद्धि का प्रमुख आधार हैं. किसान कल्याण वर्ष में हमारी सरकार पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों के समग्र कल्याण में भी कोई कसर नहीं रखेगी.
गाय का हो या भैंस का, सरकार पशुपालकों से सारा का सारा दूध खरीदेगी और इन्हें दूध का समुचित दाम भी दिलाएगी.
मुख्यमंत्री ने अपील करते हुए कहा कि सभी पशुपालक स्वस्थ और उच्च कोटि का पशुधन पालें. सरकार की डा. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना का अधिकतम लाभ उठायें.
पशुपालकों को हर संभव सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गौवंश को पर्याप्त और बेहतर आहार मिले, इसके लिए दी जाने वाली सहायता राशि हमने 20 रूपए से बढ़ाकर 40 रूपए प्रति गौवंश कर दी है.












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