नई दिल्ली. बिहार के बरौनी सुधा डेयरी से जुड़े दूध उत्पादक किसानों के लिए बेहतरीन पहल की गई है. डेयरी के नए प्रबंध निदेशक रवींद्र कुमार ने गर्मी के दौरान प्रोत्साहन योजना को फिर से लागू करने का निर्णय लिया है. यह योजना 21 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुकी है. जिससे किसानों को दो वर्षों के बाद दोबारा आर्थिक लाभ मिल रहा है. योजना के तहत लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत या उससे अधिक दूध आपूर्ति करने वाले किसानों को अधिकतम चार रुपये प्रति लीटर तक प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. वहीं संबंधित दुग्ध समितियों के सचिवों को डेढ़ रुपये प्रति लीटर तक का लाभ मिल रहा. इससे किसानों को अधिक उत्पादन के लिए प्रेरणा मिल रही है.
प्रबंध निदेशक रवींद्र कुमार ने कहा कि डेयरी की मजबूती का आधार किसान और उपभोक्ता दोनों हैं. ऐसे में उत्पादन बढ़ाने के लिए यह प्रोत्साहन योजना किसानों के लिए संजीवनी का काम करेगी. उन्होंने बताया कि पर्याप्त दुग्ध उत्पादन से न केवल राज्य बल्कि देश के विभित्र हिस्सों में सुधा डेयरी के उत्पादों की मांग को भी बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा.
एमडी ने कुछ लक्ष्य एवं शर्तें निर्धारित किए हैं
दुग्ध संघ द्वारा इस चुनौती से निपटने के लिए यह योजना दिनांक 21 अप्रैल से 16 मई 2026 के बीच लागू की गई है.
इसके लिए निर्धारित लक्ष्य 01 अप्रैल 2026 से 10 अप्रैल 2026 (दुग्ध विपत्र अवधि) में आपूर्ति औसत प्रतिदिन दूध का लक्ष्य निधारित किया गया है.
100 फीसद या उससे अधिक दूध आपूर्ति पर किसानों को 4 रु प्रति लीटर और सचिव को 1.50 प्रति लीटर जबकि सुधामित्र, पथ प्रभारी एवं क्षेत्र प्रभारी को 3000 प्रति माह प्रोत्साहन राशि देनी होगी.
90 फीसद से 99.99 परसेंट तक आपूर्ति करने पर किसानों को 3 रू प्रति लीटर और सचिव को 1.25 प्रति लीटर जबकि सुधामित्र, पथ प्रभारी एवं क्षेत्र प्रभारी को 2000 रुपए माह प्रोत्साहन राशि देय होगा.
80 परसेंट से 89.99 फीसद तक आपूर्ति करने पर किसानों को 2.00 प्रति लीटर और सचिव को 1.00 रुपए प्रति लीटर जबकि सुधामित्र, पथ प्रभारी एवं क्षेत्र प्रभारी को 1000 रुपए प्रति माह प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.
70 फीसद से 79.99% तक आपूर्ति करने पर किसानों को 1.00 प्रति लीटर और सचिव को 0.75 प्रति लीटर जबकि सुधामित्र, पथ प्रभारी एवं क्षेत्र प्रभारी को 500 प्रति माह प्रोत्साहन राशि मिलेगी.
बता दें ये प्रोत्साहन विपत्र वार औसत दूध संग्रहण पर देय होगा. 60 फीसद से 69.99 परसेंट तक आपूर्ति करने पर कोई प्रोत्साहन नहीं एवं कोई कटौती नहीं होगी.
निर्धारित लक्ष्य के 60 परसेंट से कम दूध आपूर्ति करने पर जितनी दूध की मात्रा कम होगी. उस गात्रा पर 4 रुपए प्रति किलो की कटौती की जाएगी, जो किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं होगा.
आपूर्ति दूध के विपत्र अवधि का फैट-3.0 फीसद और एसएनएएफ – 8.2% से कम होने की स्थिति में प्रोत्साहन राशि (इन्सेंटीव) देय नहीं होगा.
यानि प्रोत्साहन की गणना के लिए दूध की गुणवता फैट 3.0 या अधिक एवं एसएनएफ 8.2% अथवा इससे अधिक होना आवश्यक होगा.
11 अप्रैल 2026 से पुनर्जीवित अथवा नई समिति का न्यूनतम लक्ष्य 100 रुपए प्रति किलो प्रतिदिन तय किया गया है.









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