नई दिल्ली. अगर कहीं भी सरकार सहकारी डेयरी नेटवर्क का विस्तार करती है तो इसका सीधा फायदा डेयरी किसानों को मिलता है. असल में सहकारी डेयरी नेटवर्क के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है. डेयरी किसानों की इनकम भी बढ़ जाती है. दूध उत्पादन को बढ़ाने में एक क्रांतिकारी भूमिका ये निभाता है. इन्हीं उद्देश्यों को पाने के लिए भारत सरकार सहकारिता मंत्रालय ने फैसला लिया है कि पूर्वोत्तर राज्यों में सहकारी डेयरी नेटवर्क को विस्तारित किया जाएगा. जिसको लेकर अहम वर्कशॉप का आयोजन भी किया है.
इस कार्यशाला में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार भूटानी, सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन, NCDC के प्रबंध निदेशक और सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पंकज कुमार बंसल, सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव रमन कुमार, सहकारिता मंत्रालय के निदेशक श्री कुमार राम कृष्ण, NABARD Online की CGM अर्चना सिंह और NABARD, NCDC India, राज्य सरकारों तथा पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न सहकारी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया.
इन बातों पर रहा ज्यादा जोर
वहीं भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आइजोल में पूर्वोत्तर राज्यों के लिए सहकारिता पर आयोजित “सहकार से समृद्धि” क्षेत्रीय कार्यशाला के दौरान, NDDB के क्षेत्रीय प्रमुख (NES) डॉ. सब्यसाची रॉय ने ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र में सहकारी डेयरी नेटवर्क के विस्तार और उसे मजबूत करने पर एक प्रेजेंटेशन दिया.
समावेशी ग्रामीण विकास के प्रति NDDB के सहकारिता-आधारित दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. रॉय ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत करने और ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार लाने के लिए लागू की जा रही विभिन्न पहलों के बारे में विस्तार से बताया.
उन्होंने ग्राम-स्तरीय डेयरी सहकारी समितियों के विस्तार, दूध खरीद और डेयरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, कृत्रिम गर्भाधान (AI) और प्रजनन सेवाओं के माध्यम से पशु उत्पादकता में सुधार लाने की बात कही.
कहा कि चारा विकास को बढ़ावा देने, डिजिटल दूध परीक्षण और पारदर्शी भुगतान प्रणालियों को शुरू करने, महिला डेयरी किसानों को सहायता प्रदान करने की जरूरत है.
बाजार तक पहुंच को सुगम बनाने और किसानों के स्वामित्व वाली टिकाऊ डेयरी मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण से संबंधित पहलों की रूपरेखा भी सभी के सामने पेश की.
उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि, विभिन्न राज्य सरकारों और भारत सरकार की योजनाओं के समन्वय के माध्यम से, NDDB दुग्ध संघों को वित्तीय, तकनीकी और संस्थागत सहायता प्रदान कर रहा है.
इसके साथ ही वह इस क्षेत्र में सहकारी शासन, परिचालन दक्षता और दीर्घकालिक स्थिरता को मजबूत करने के लिए पेशेवर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और डिजिटल हस्तक्षेप भी उपलब्ध करा रहा है.










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