नई दिल्ली. सरकारें राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB की मदद से अपने राज्यों में डेयरी सेक्टर को मजबूत कर रही हैं. जिसका फायदा डेयरी किसानों को मिल रहा है. इसी कड़ी में मिजोरम में एक अहम काम हुआ है. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री (पशुपालन और डेयरी विभाग, FAHD मंत्रालय) और पंचायती राज मंत्री (पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार) राजीव रंजन सिंह ‘ललन सिंह’ ने MULCO डेयरी, आइजोल, मिजोरम में MULCO काऊ घी और डेयरी किसानों के लिए कई तरह के तकनीकी इनपुट लॉन्च किए.
केंद्रीय राज्य मंत्री (मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज) इस कार्यक्रम में प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री (मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय) जॉर्ज कुरियन, पु लालथांसांगा, माननीय मत्स्य पालन मंत्री, मिजोरम सरकार की भी इस मौके पर मौजूदगी रही.
किसानों की बढ़ेगी इनकम
MULCO काऊ घी का लॉन्च मिजोरम में सहकारी डेयरी किसानों के लिए वैल्यू एडिशन को मजबूत करने और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
लॉन्च किए गए तकनीकी इनपुट में बेल्ड साइलेज, BIS टाइप II पशु आहार, मिनरल मिश्रण, डीवर्मर, कैल्शियम और मिनरल सप्लीमेंट, न्यूट्रास्यूटिकल्स और पशु स्वास्थ्य से जुड़े अन्य उत्पाद शामिल थे.
इनका उद्देश्य राज्य में दुधारू पशुओं के लिए वैज्ञानिक आहार पद्धतियों, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और बेहतर उत्पादकता को बढ़ावा देना है.
वहीं आइजोल, मिजोरम में ‘मिजो कैफ़े’ और ‘FPO कार्यालय-सह-बिक्री केंद्र’ का भी उद्घाटन किया गया.
मिजो कैफे को एक आधुनिक दूध-आधारित पेय आउटलेट के रूप में विकसित किया गया है.
जिसका उद्देश्य मूल्य-वर्धित डेयरी उत्पादों को बढ़ावा देना, उपभोक्ताओं तक पहुंच को मजबूत करना और मिजोरम में सहकारी डेयरी किसानों के लिए बेहतर बाजार के अवसर पैदा करना है.
कैफे के लिए कॉफी बीन्स स्थानीय स्तर पर आइजोल जिले के कॉफी उत्पादकों से प्राप्त करने का प्रस्ताव है.
जिससे स्थानीय कृषि को समर्थन मिलेगा और किसानों के लिए आजीविका के अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे.
आइजोल चारा FPO का कार्यालय-सह-बिक्री केंद्र—जिसके लिए MULCO डेयरी ‘CBBO’ (क्लस्टर आधारित व्यावसायिक संगठन) के रूप में कार्य करती है.
यह सुनिश्चित करेगा कि डेयरी किसानों को गुणवत्तापूर्ण फ़ीड, चारा और पशु स्वास्थ्य उत्पाद समय पर उपलब्ध हों.
इसका उद्देश्य राज्य में वैज्ञानिक आहार पद्धतियों, निवारक स्वास्थ्य देखभाल और दुधारू पशुओं की उत्पादकता में सुधार को बढ़ावा देना है.












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