नई दिल्ली. पशुपालन को बढ़ावा देने का सरकार प्रयास कर रही है. हालांकि इसके लिए सबसे जरूरी ये है कि पशुओं में होने वाली तमाम बीमारियों पर कंट्रोल किया जाए. ताकि इससे किसानों का फायदा ज्यादा बढ़े और अन्य किसान भी इससे प्रभावित होकर पशुपालन के काम में आगे आएं. एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं को वक्त पर इलाज देने में सरकार की तरफ से शुरू की गई मोबाइल वेटनरी वैन बेहतर काम कर रही है. इसमें दिन ब दिन सुधार भी किया जा रहा है. ताकि इसकी उपयोगिता और ज्यादा बढ़ जाए.
अब बिहार में मवेशियों को ऑन-स्पॉट इलाज देने के लिए शुरू की गई मोबाइल वेटनरी वैन अब हाईटेक की जा रही है. बिहार के सभी 534 मोबाइल वेटनरी वैन को सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस सिस्टम से लैस किया जाएगा. इससे उसकी निगरानी हो सकेगी.
ऑनलाइन पर्ची मिलेगी, सभी जानकारी रहेगी
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने वैन को हॉस्पिटल ऑन व्हील के रूप में विकसित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है.
जल्द ही यह लागू होगी. विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने बताया कि पशु पालकों की शिकायत रहती थी कि उनके गांव में मोबाइल वेटनरी वैन नहीं पहुंच पा रही है.
वैन चलाने की भी समस्या थी पहले वैन में इन्वर्टर, बैट्री, फ्रीज और माइकिंग सिस्टम नहीं था. इसके कारण मवेशियों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता था.
वैन में फ्रीज नहीं रहने से दवाओं की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही थी. अब मोबाइल वेटनरी वैन की रिपोर्टिंग जिला पशुपालन पदाधिकारी करेंगे.
जिला पशुपालन पदाधिकारी डीएम को रिपोर्टिंग करेंगे. टॉल फ्री नंबर 1962 पर कॉल करने के 15-20 मिनट के अंदर पशुपालकों के पास मोबाइल वैन पहुंच जाएगी.
पशुपालकों को मोबाइल वेटनरी वैन में पशुओं का इलाज कराने पर अब ऑनलाइन पर्ची मिलेगी. विभाग एक सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है.
इसमें पशुपालकों का मोबाइल नंबर, पशुओं की बीमारी, इलाज, पता अंकित रहेगा. ऑनलाइन पर्ची कटते ही डॉक्टर के साथ पशुपालकों की सारी सूचना मिल जाएगी.
इससे इलाज में पारदर्शिता आएगी. साथ पेपरलेस काम को बढ़ावा मिलेगा. मोबाइल वेटनरी वैन पर एक टीवी स्क्रीन भी लगाया जाएगा.
इसपर डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाएगा. मोबाइल वेटनरी वैन में चेहरा स्कैन कर हाजिरी बनाने का सिस्टम लगाया जाएगा.
इससे डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर लगाम लगाया जा सकेगा. इस वैन में लगे सीसीटीवी कैमरे से 8 घंटे तक मुख्यालय स्तर पर बने कॉल सेंटर से निगरानी हो सकेगी.
इसके लिए विभाग कॉल सेंटर को अपग्रेड करने का काम कर रहा है.












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