नई दिल्ली. पंजाब के 12 जिलों के 62 ट्रेनी (जिनमें पांच महिलाएं भी शामिल थीं) ने गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना में दो हफ्ते का गहन डेयरी ट्रेनिंग प्रोग्राम सफलता के साथ पूरा किया. इससे साइंटिफिक डेयरी फार्मिंग में बढ़ती दिलचस्पी का पता चलता है. ट्रेनीज को एक्सपर्ट लेक्चर, प्रैक्टिकल डेमो और एजुकेशनल विज़िट के जरिए साइंटिफिक डेयरी फार्मिंग, जानवरों की सेहत, चारा, ब्रीडिंग, बायोसिक्योरिटी, रहने की जगह, साफ़ दूध का उत्पादन, वैल्यू एडिशन और एंटरप्रेन्योरशिप की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी गई.
वाइस-चांसलर डॉ. जेपीएस गिल ने खास तौर पर ट्रेनीज से बातचीत की और उन्हें वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और एंटरप्रेन्योरशिप अपनाकर पारंपरिक दूध उत्पादन से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
इंटिफिक डेयरी प्रैक्टिस अपनाने के लिए किया प्रोत्साहित
एक्सटेंशन एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने ट्रेनीज को साइंटिफिक डेयरी प्रैक्टिस अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया.
ट्रेनिंग के समापन सत्र के दौरान किसान समुदाय को यूनिवर्सिटी की तरफ से लगातार मदद का भरोसा दिलाया.
उन्होंने कहा कि डेयरी हमेशा चलने वाला बिजनेस है जिसकी मांग कभी कम नहीं होती, बस ज़रूरत इस बात की है कि ग्राहकों की मांग को पूरा किया जाए.
डिपार्टमेंट के हेड डॉ. जसविंदर सिंह ने बेहतरीन प्लानिंग और ओवरऑल कोऑर्डिनेशन के साथ प्रोग्राम का नेतृत्व किया और इसे सफलतापूर्वक पूरा कराया.
पंजाब के डेयरी डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर सुरिंदर सिंह ने भी डेयरी किसानों के फायदे के लिए अपने अनुभव और योजनाओं के बारे में जानकारी दी.
इस प्रोग्राम का कोऑर्डिनेशन डॉ. अक्षिता चड्ढा, डॉ. कृतिका वर्मा और स्टूडेंट कोऑर्डिनेटर डॉ. सौरव उप्पल ने किया.
ट्रेनीज ने आसान तरीके से साइंटिफिक जानकारी देने के लिए यूनिवर्सिटी के टीचरों की तारीफ की.
क्या है साइंटिफिक डेयरी फार्मिंग
साइंटिफिक डेयरी फार्मिंग को अगर कुछ आसान शब्दों में समझा जाए तो ये पशुओं के स्वास्थ्य, पोषण, प्रजनन और उनके रहने की जगह (शेड) के लिए आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों का सही इस्तेमाल है. जिससे डेयरी फार्मिंग में फायदा बढ़ जाता है.
एक्सपर्ट कहते हैं कि इसका मुख्य उद्देश्य लागत को कम करके दूध का अधिकतम उत्पादन प्राप्त करना और व्यवसाय को अधिक लाभदायक बनाना है。











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