नई दिल्ली. मुर्गी पालन में मुर्गियों हों या मुर्गे दोनों को ही बीमारियों से बचाना बहुत जरूरी है. तभी मुर्गी पालन में आपको फायदा मिलेगा. जब मुर्गियां हैल्दी होंगी तो खुद ब खुद बेहतर उत्पादन मिलेगा. जबकि बीमारियां उत्पादन को घटाती ही हैं. साथ ही गंभीर बीमारी पोल्ट्री फार्मिंग में मौत के दरवाजे को खोल देती है. मुर्गियों की मौत का सीधा सा मतलब है कि पोल्ट्री कारोबार न सिर्फ घाटे में चला जाएगा, बल्कि ये बंद हो सकता है. इसलिए बेहद ही जरूरी है कि मुर्गियों को बीमारियों से बचाया जाए.
एक्सपर्ट के मुताबिक मुर्गियों को बीमारियों से बचाने का सबसे आसान तरीका वैक्सीनेशन है. इसलिए हम इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि मुर्गियों में एफ 1 और बी 1 वैक्सीन लगाने का क्या सही तरीका है. क्योंकि ये भी बेहद अहम वैक्सीन है.
जानें वैक्सीन देने का तरीका
बता दें कि F1 टीका रानीखेत बीमारी से बचाव के लिए दिया जाता है.
चूजों को 7 से 10 दिन की उम्र में पहला टीका (F1) दिया जाता है.
डोज की बात करें तो 1 डोज 100 चूजों के लिए होती है.
1 मिलीलीटर वैक्सीन चूजों को दें.
आई ड्रॉप के जरिए आंख में डालकर वैक्सीन दें.
पहले वैक्सीन की शीशी को अच्छी तरह हिलाएं.
वैक्सीन को साफ ड्रॉपर में भरें.
चूजे की आंख को हल्का सा खोलें.
एक बूंद (1 drop) वैक्सीन आंख में डालें.
चूजे को छोड़ दें, वह खुद आंख बंद कर लेगा.
बता दें कि टीका खोलने के बाद 2 घंटे के भीतर उपयोग करें.
टीका ठंडे पानी (बर्फ नहीं) में रखें.
टीका देने के 2 घंटे पहले चूजों को पानी न दें.
एक ही ड्रॉपर से कई चूजों को टीका न दें, साफ रखें.
B1 टीका गम्बोरो यानि IBD के लिए दिया जाता है.
14 से 18 दिन की उम्र में पहला टीका बी1 लगाएं.
1 मिलीलीटर वैक्सीन 100 चूजों को लगाई जा सकती है.
पानी में घोलकर वैक्सीन दें.
पहले वैक्सीन की शीशी को अच्छी तरह हिलाएं.
1 मिलीलीटर वैक्सीन को 1 लीटर साफ, ठंडे पानी में घोलें.
इस घोल को चूजों को 1-2 घंटे के लिए पिलाएं.
इन 1-2 घंटों में और कोई पानी न दें.
बाकी पानी हटा दें और नया ताजा पानी दें.
पानी एकदम साफ और ठंडा हो.
क्लौरीन वाला पानी उपयोग न करें.
टीका घोलने के 2 घंटे के भीतर उपयोग करें.
चूजों को टीका देने के 2 घंटे पहले पानी न दें.
वैक्सीन को हमेशा 2°C-8°C के बीच रखें. वैक्सीन को फ्रिज में रखें.












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