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Fish: PM-MKSY में जरिए फिशरीज सेक्टर में बड़े बदलाव का है प्लान

फिश एक्सपर्ट का कहना है कि मछली सेहत के लिए फायदेमंद है.
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत केंद्रीय क्षेत्र की उप-योजना प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (पीएम-एमकेएसवाई) को वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2026-27 तक चार वर्षों की अवधि के लिए मंजूरी दी. पीएम-एमकेएसवाई को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 6000 करोड़ रुपये के अनुमानित व्यय के साथ लागू किया जाएगा. पीएम-एमकेएसवाई का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र के लंबे परिवर्तन को समर्थन देने के लिए संस्थागत सुधार लाने के लिए पहचाने गए वित्तीय और तकनीकी कार्यक्रमों के माध्यम से इस क्षेत्र की अंतर्निहित कमजोरियों को दूर करना है.

पीएम-एमकेएसएसवाई योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय मत्स्य डिजिटल प्लेटफॉर्म (एनएफडीपी) के तहत कार्य-आधारित डिजिटल पहचान बनाकर असंगठित क्षेत्र के क्रमिक औपचारिककरण को बढ़ावा देकर मत्स्य पालन क्षेत्र में प्रमुख संरचनात्मक कमियों को दूर करना है. ताकि बेहतर सेवा वितरण सुनिश्चित किया जा सके.

बीमा खरीदने पर एक मुश्त प्रोत्साहन मिलता है
यह योजना मछली पालकों, मछुआरों और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए कार्यशील पूंजी सहित संस्थागत वित्त तक बेहतर पहुंच को सुगम बनाती है.

साथ ही जलीय कृषि करने वालों को एक फसल चक्र के लिए मत्स्य पालन बीमा खरीदने पर एकमुश्त प्रोत्साहन भी प्रदान करती है.

इसके अतिरिक्त, यह योजना मत्स्य पालन और जलीय कृषि से जुड़े सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को प्रदर्शन अनुदान के माध्यम से प्रोत्साहित करती है.

ताकि मूल्य श्रृंखला की दक्षता में सुधार हो, मछली और मत्स्य उत्पाद सुरक्षा एवं गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों को मजबूत किया जा सके.

रोजगार के अवसर सृजित और बनाए रखे जा सकें और मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखलाओं के एकीकरण एवं सुदृढ़ीकरण को बढ़ावा दिया जा सके.

पीएम-एमकेएसएसवाई के तहत लक्षित लाभार्थियों में मत्स्यपालक, मत्स्य श्रमिक और मत्स्य विक्रेता शामिल हैं जो मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला में सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं.

साथ ही भारत में पंजीकृत मत्स्य पालन और जलीय कृषि से जुड़े सूक्ष्म और लघु उद्यम जैसे कि निजी फर्म, साझेदारी फर्म और कंपनियां भी शामिल हैं.

इस योजना में समितियां, सीमित देयता भागीदारी, सहकारी समितियां, संघ, ग्राम स्तरीय संगठन जैसे स्वयं सहायता समूह, मत्स्यपालक उत्पादक संगठन और मत्स्य पालन और जलीय कृषि मूल्य श्रृंखला में लगे स्टार्टअप भी शामिल हैं.

इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा पहचाने गए अन्य लाभार्थियों को भी इस योजना के तहत लक्षित लाभार्थियों में शामिल किया जा सकता है.

Written by
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