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Dairy Sector: बिहार समेत पांच राज्यों में डेयरी सेक्टर को मजबूत करने पर 4 फॉर्मूले पर होगा काम

बैठक में शामिल हुए कई राज्यों के अधिकारी.

नई दिल्ली. डेयरी के बिजनेस के जरिए किसानों की इनकम को बढ़ाने का प्रयास सरकारें कर रही हैं. डेयरी सेक्टर की कमियों को दूर करने का प्रयास भी किया जा रहा है. इसी कड़ी में पिछले दिनों भारत सरकार के ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट’ (NPDD) के तहत, ‘डेयरिंग थ्रू कोऑपरेटिव्स’ (DTC) – JICA (जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी) प्रोजेक्ट के ‘कंपोनेंट B’ के तहत कोलकाता में एक क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई थी. इसमें बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सहकारी डेयरी फेडरेशन और दुग्ध संघों ने भाग लिया.

कार्यशाला में DTC-JICA के पहले चरण (फेज I) के कार्यान्वयन, उपलब्धियों और सीखों की समीक्षा की गई. इसमें डेयरी वैल्यू चेन से जुड़े मुख्य कार्यों पर चर्चा हुई, जैसे डेयरी सहकारी नेटवर्क और दूध खरीद को मजबूत करना, कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना और वैल्यू-एडेड उत्पादों के निर्माण की सुविधाओं का आधुनिकीकरण करना.

ताकि मिल सके बेहतर मदद
पहले चरण के अनुभव के आधार पर, प्रस्तावित ‘डेयरी विकास चरण II’ का उद्देश्य इस पहल को और राज्यों तक फैलाना है.

ताकि डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत करने के लिए व्यापक कवरेज और बेहतर सहायता मिल सके.

चर्चा मुख्य रूप से प्रस्तावित घटकों, फंडिंग के तरीके, पात्रता मानदंडों और राज्य-वार आवश्यकताओं के साथ-साथ सहकारी डेयरी क्षेत्र के लिए प्रस्तावित एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क (मान्यता ढांचा) पर केंद्रित रही.

कार्यशाला में ‘श्वेत क्रांति 2.0’ (White Revolution 2.0) के तहत राज्य-वार प्रगति की भी समीक्षा की गई.

खासतौर पर नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन और पंजीकरण तथा ‘डेयरी विकास पोर्टल’ पर डेटा अपडेट करने की स्थिति पर.

इस कार्यशाला में पशुपालन और डेयरी विभाग (FAHD मंत्रालय) के डिप्टी कमिश्नर (DD) दयानंद सावंत, बिहार सरकार के DFARD सचिव और Comfed Sudha के चेयरमैन व MD कपिल अशोक शामिल हुए.

इसके अलावा पश्चिम बंगाल कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर दीपांजन भट्टाचार्य, ‘मेधा- ताजगी झारखंड की’ के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश गुप्ता और NDDB तथा पूर्वी क्षेत्रों के दुग्ध फेडरेशन और संघों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया.

भाग लेने वाले संस्थानों से मिले बहुमूल्य फीडबैक और सुझाव ‘डेयरी विकास चरण II’ के लिए रोडमैप तैयार करने में मदद करेंगे.

वहीं पूर्वी क्षेत्र में डेयरी सहकारी समितियों, दूध खरीद के बुनियादी ढांचे और समग्र डेयरी वैल्यू चेन को और मजबूत बनाने में सहायक होंगे.

Written by
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