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MP Dairy News: 26 हजार गांवों से दूध संकलन का बनाया टारगेट, पांच साल में पूरा होगा ये लक्ष्य

This scheme aims at the development and conservation of indigenous breeds, genetic upgradation of bovine population, enhancement of milk production and productivity of bovines thereby making dairying more remunerative to farmers. The following steps have been undertaken under the scheme.
दूध की प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश को देश की अग्रणी ‘मिल्क कैपिटल’ के रूप में स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने सांची ब्रांड को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ ऐतिहासिक अनुबंध किया है. इसके तहत दैनिक दुग्ध संकलन क्षमता बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन करने का रोडमैप तैयार किया गया है. पशुपालकों को उनके परिश्रम का सही मूल्य दिलाने के लिए दुग्ध संघों द्वारा दूध की खरीदी दरों में रिकॉर्ड 2.50 से लेकर 8.50 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी की गई है. इसके फलस्वरूप दुग्ध संघों ने उत्पादक किसानों को पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक राशि का सीधा भुगतान किया है.

वर्तमान में प्रदेश में प्रतिदिन 9.67 लाख किलोग्राम औसत दूध संकलन की ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो चुकी है. अगले 5 वर्षों के भीतर दूध संकलन वाले गांवों की संख्या को 9 हजार से बढ़ाकर 26 हजार किया जाएगा. साथ ही प्रदेश के कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियां बनाई जाएंगी.

योजना के जरिए दी जा रही है सौगात
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को लाभकारी बनाने के लिए हर विकासखंड के एक गांव को आदर्श वृंदावन ग्राम के रूप में विकसित किया जा रहा है.

डॉ. अम्बेडकर कामधेनु योजना के तहत 25 दुधारू पशुओं की नई कमर्शियल डेयरी इकाई लगाने के लिए 42 लाख रुपए तक की ऋण सहायता दी जा रही है.

जिसमें 25 फीसद से लेकर 33 परसेंट तक की भारी सब्सिडी का प्रावधान है. इसके अलावा 10 से ज्यादा गाय पालने पर सरकार द्वारा विशेष अनुदान दिया जा रहा है.

ग्वालियर में बायोगैस सीएनजी प्लांट स्थापित
पशुधन कल्याण के लिए ग्वालियर की आदर्श गौ-शाला में देश के पहले 100 टन क्षमता वाले बायोगैस आधारित सीएनजी प्लांट की सफल स्थापना की जा चुकी है.

चिकित्सा सुविधाओं को सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए ग्वालियर में आधुनिक ‘पशु केयर एंड वेलनेस सेंटर’ तथा डबरा में नया हाईटेक पशु चिकित्सालय स्थापित किया जा रहा है.

इसके साथ ही पशुओं के नस्ल सुधार के लिए पूरे प्रदेश में “हिरण्यगर्भा अभियान” का प्रभावी संचालन किया जा रहा है.

सुनिश्चित खरीदी अगले 5 वर्षों में दायरा 9 हजार से बढ़कर 26 हजार गांव होने से पशुपालकों को दूध बेचने के लिए अपने गांव में ही पक्का बाजार मिल जाएगा.

सीधे खाते में ज्यादा लाभः खरीदी दरों में ₹8.50 प्रति लीटर तक की वृद्धि और कुल भुगतान में 15% की बढ़ोतरी से ग्रामीण परिवारों की दैनिक नकदी आय बढ़ी है.

कमर्शियल डेयरी को संबल 42 लाख रुपये तक के ऋण पर 33% तक की भारी सरकारी सब्सिडी से युवाओं के लिए डेयरी क्षेत्र में स्वरोजगार शुरू करना आसान हुआ है.

नस्ल सुधार से उत्पादनः हिरण्यगर्भा अभियान के तहत उन्नत पशु नस्ल तैयार होने से प्रति पशु दुग्ध उत्पादन क्षमता में आने वाले समय में भारी वृद्धि होगी.

Written by
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