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Fish Production: छत्तीसगढ़ में हुआ दोगुना मछली उत्पादन, 10 लाख टन पहुंचा प्रोडक्शन

मछली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो पूरे मछली के बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
तालाब में पाली गई मछली की तस्वीर.

नई दिल्ली. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने 20 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ के रायपुर में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत अधिसूचित तिलापिया क्लस्टर की प्रगति की समीक्षा के लिए एक संवादात्मक बैठक की अध्यक्षता की. इस दौरान उन्होंने तिलापिया मछली पालकों, उद्यमियों, निर्यातकों और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ संवाद कर जमीनी स्तर पर सामने आने वाली कमियों और चुनौतियों को समझा. इस संवाद के दौरान डॉ. अभिलक्ष लिखी ने मछली पालकों, उद्यमियों और हितधारकों के प्रयासों की सराहना की.

उन्होंने कहा कि इन सभी का योगदान मत्स्य पालन के क्षेत्र की उल्लेखनीय वृद्धि में महत्वपूर्ण रहा है. उन्होंने बताया कि वैश्विक व्यापार में व्यवधान के बावजूद भारत ने 198 लाख टन का रिकॉर्ड मत्स्य उत्पादन और 73,890.46 करोड़ रुपये का समुद्री खाद्य निर्यात हासिल किया है.

900 करोड़ रुपए का किया है निवेश
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण बीज, चारा और आधुनिक जलीय कृषि प्रौद्योगिकियों के लिए पीएमएमएसवाई के तहत लगभग 900 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है.

जिससे राज्य का मछली उत्पादन लगभग दोगुना होकर 10 लाख टन हो गया है. जिसका फायदा मछली किसानों को मिला है.

सरकार के क्लस्टर-आधारित विकास दृष्टिकोण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अधिसूचित मत्स्य पालन क्लस्टरों को उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार संपर्क सहित सभी स्तरों पर व्यापक सहायता प्रदान की जा रही है. ताकि प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सके और निर्यात को प्रोत्साहन मिल सके.

उन्होंने राज्य सरकार, अनुसंधान संस्थानों, निर्यातकों और किसानों को मूल्य श्रृंखला में मौजूद कमियों को दूर करने, आईसीएआर संस्थानों के साथ संबंधों को मजबूत करने, क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने और राज्य के लिए एक समर्पित निर्यात रोडमैप तैयार करने में घनिष्ठ सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया.

उन्होंने एमपीईडीए से छत्तीसगढ़ में अपनी उपस्थिति बढ़ाने तथा हितधारकों के लिए बाजार तक पहुंच, निर्यात संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव प्राप्त करने के अवसरों को सुगम बनाने का भी आग्रह किया.

बैठक के बाद डॉ. अभिलक्ष लिखी ने रायपुर के माना स्थित एमएम हैचरी का दौरा किया. जहां उन्होंने तिलापिया मछली में आनुवंशिक सुधार और जलीय कृषि क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज उत्पादन से संबंधित पहलों की समीक्षा की और मछली पालकों के साथ संवाद किया.

एमएम हैचरी एक समर्पित तिलापिया हैचरी है, जो गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन और आनुवंशिक रूप से उन्नत काली स्ट्रेन तिलापिया के विकास में संलग्न है.

अपने चल रहे आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम के माध्यम से हैचरी मत्स्य बीज की गुणवत्ता, उत्पादकता और समग्र मत्स्य पालन प्रदर्शन में सुधार कर रही है, जिससे तिलापिया पालन के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है.

Written by
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