नई दिल्ली. बिहार में मछली पालन को किसनों की आय में वृद्धि का महत्वपूर्ण जरिया बनाने के लिए सरकार की तरफ से काम किया जा रहा है. इसी सिलसिले में मधेपुरा जिले में मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग बिहार सरकार की ओर से जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस इसका उद्देश्य जिले के मछली किसानों को आधुनिक मछली पालन तकनीक, विभागीय योजनाओं, अनुदान और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देना था. साथ ही वैज्ञानिक और फायदेमंद मछली पालन के लिए मछली किसानों को प्रोत्साहित किया गया. ताकि उनकी इनकम बढ़ाई जा सके.
राष्ट्रीय मत्स्कीय विकास बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय पटना और मत्स्य पालन पशुपालन और डेयरी मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इस दौरान डीएम अभिषेक रंजन ने कहा कि मछली पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने का बेहतरीन जरिया है. साथ ही किसानों की आय में वृद्धि करने का महत्वपूर्ण माध्यम है. उन्होंने किसानों से पारंपरिक मछली पालन के साथ-साथ आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक अपनाने की भी अपील की.
बायोफ्लॉक और आरएएस तकनीक की भी जानकारी दी गई
डीएम ने विभाग द्वारा किसानों को संचालित योजनाओं के फायदा उठाते हुए मछली पालन को रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रभावी तरीका बताया.
उन्होंने तालाब निर्माण, बायोफ्लॉक तकनीक, आरएएस, मछली बीज उत्पादन और विभिन्न अनुदान आधारित योजनाओं की जानकारी दी.
साथ ही अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन योजनाओं का फायदा पात्र किसानों को समय रहते दिया जाए.
वहीं मछली किसानों को उन्नत मछली पालन तकनीक, तालाब प्रबंधन, मछली बीज उत्पादन, बायोफ्लॉक और आरएएस तकनीक की भी जानकारी दी गई.
इन चीजों के लिए विभागीय योजनाओं की पात्रता, अनुदान की प्रक्रिया और मछली पालन में उपलब्ध रोजगार और रोजगार के अवसरों के संबंध में भी जानकारी उपलब्ध कराई गई.
कई किसानों ने सवाल भी किया तो उनके सवालों के जवाब भी दिए गए. उनकी समस्याओं कभी समाधान निकालने की बात कही गई.
निष्कर्ष
गौरतलब है कि बिहार जलस्त्रोत की कमी नहीं है. इसलिए ये मछली पालन के लिए आदर्श है. सरकार चाहती है कि किसान मछली पालन के काम में आग आएं और मछली पालन करके अपनी इनकम को बढ़ाएं. जबकि मछली पालन से बहुत से किसान अच्छी कमाई कर भी रहे हैं. वो दूसरों को रोजगार भी दे रहे हैं.











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