Home डेयरी Scheme: दो गायों से की थी शुरुआत, मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना की मदद से अब फॉर्म में हैं 47 पशु
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Scheme: दो गायों से की थी शुरुआत, मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना की मदद से अब फॉर्म में हैं 47 पशु

डेयरी महिला किसान.

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन विभाग की ओर से पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं. उन्हीं योजनाओं में से एक योजना मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना भी है. जिसका फायदा उठाकर अमेठी जिले की एक महिला किसान आत्मनिर्भर बन चुकी हैं. उन्होंने डेयरी के बिजनेस में सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं. अमेठी की रहने वाली सविता यादव और उनके परिवार के लोगों ने मिलकर कामयाबी की सीढ़िया चढ़ीं हैं. जिन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना का लाभ उठाकर डेयरी और गोपालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है.

सविता कहती हैं कि शादी के बाद पति बाहर नौकरी करने जाते थे. परिवार ने घर पर रहकर ही स्वावलंबन के लिए केवल 2 देसी गायों से गोपालन की शुरुआत की. शुरुआत में दूध कम मिलने के कारण उन्होंने कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षण लेकर गोबर से दीये, मूर्तियां, धूपबत्ती और गुलाल बनाना शुरू किया.

अहमदाबाद से हासिल की ट्रेनिंग
इसमें उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को भी जोड़ा गया. स्थानीय प्रशासन ने विभिन्न कार्यक्रमों व विकास भवन में स्टॉल लगाने का अवसर देकर उनकी मार्केटिंग में मदद की.

यहीं से बदलाव शुरू हुआ और स्टॉल के दौरान पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें सरकारी मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के बारे में बताया, जिसमें महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है.

लकी ड्रॉ के माध्यम से उनका चयन हुआ. योजना के तहत उन्हें शेड निर्माण के लिए अनुदान और साहीवाल तथा थारपारकर जैसी उच्च दुग्ध क्षमता वाली उन्नत नस्ल की गायें प्राप्त हुईं.

पशुओं का 3 वर्ष का बीमा करवाया गया और स्थानीय ब्लॉक स्तर से नियमित टीकाकरण (Vaccination) व पैरावेट पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित की गई.

लाभार्थी के रूप में सरकारी खर्च पर गुजरात (अहमदाबाद) में आधुनिक गोपालन, वैज्ञानिक फीडिंग, मिल्क मैनेजमेंट और बायोगैस तकनीक सीखने का अवसर मिला.

फिर घर पर 2 क्यूबिक मीटर का बायोगैस प्लांट लगाया गया, जिससे 6 सदस्यों वाले परिवार के लिए प्रतिदिन खाना पकाने की गैस उपलब्ध होती है.

जबकि 2 गायों से शुरू हुआ सफर अब छोटे-बड़े मिलाकर लगभग 47 गायों तक पहुंच चुका है. इससे अन्हें अच्छा फायदा हो रहा है.

निष्कर्ष
गोपालन से हुई आय के माध्यम से परिवार ने 15 HP का ट्रैक्टर-ट्रॉली, व्यावसायिक उपयोग के लिए छोटा हाथी (लोडर वाहन), और निजी उपयोग के लिए एक कार खरीदी, जिससे उनकी खेती और दैनिक जीवन पूरी तरह सुगम व आत्मनिर्भर बन गया. यदि आप भी सरकारी योजना का फायदा लें तो इस तरह से कामयाब हो सकते हैं.

Written by
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