नई दिल्ली. बिहार मछली उत्पादन के मामले में आगे बढ़ रहा है. सिर्फ सूबे के खगड़िया की बात करें तो नदी-पानी का ये जिला अपार जलश्रोत यहां समृद्धि *की कहानी लिख रहा है. भले ही राज्य में मछली उत्पादन में खगड़िया का आठवां स्थान है है लेकिन बीते वित्तीय वर्ष 2025-26 में यहां 39.24 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ है. जो बीते वर्ष से ज्यादा है. यानि 2024-25 में 38.88 हजार मीट्रिक टन मछली का उत्पादन यहां हुआ थाा. इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में 47.47 हजार मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य है. इस वर्ष गंगा और बूढ़ी गंडक को बाढ़ के कारण मछली उत्पादन में लक्ष्य से आगे जाने की उम्मीद है.
जिला मत्स्य पदाधिकारी लाल बहादुर साफी ने बताया कि मछली उत्पादन में पांच गुणा वृद्धि को लेकर कलस्टर निर्माण को ले जिला पदाधिकारी की ओर से सचिव डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग, बिहार सरकार को योजना स्वीकृति के लिए पत्र भेजा गया है. जिला में एक लाख लोग मछली पालन कर खरीद बिक्री कर रहे हैं.
खगड़िया मछली उत्पादन में लगातार आगे बढ़ रहा है
कसरैया धार की मछलियों की होगी ब्रांडिंग की तैयारी हो रही है. कसरैया धार, स्वाद अपार’ नाम से ब्रांडिंग की तैयारी चल रही है.
कसरैया कतला, कसरैया रेवा, कसरैया पलवा, कसरैया पवदा, कसरैया सिंगी, कसरैया मांगुर आदि नाम से ब्राडिंग होगी.
इसको लेकर प्रपोजल तैयार हो रहा है. मालूम हो कि कसरैया धार की मछलियां स्वाद को लेकर प्रसिद्ध है.
इस धार की लंवाई छह किलोमीटर है और यहां 63 प्रकार की देसी मछलियां पाई जाती है। वर्ष भर पानी रहता है.
धार की गहराई 30 से 40 फीट तक है. यह धार खगड़िया के तीन प्रखंडों, चौथम, गोगरी और मानसी से होकर गुजरती है.
खगड़िया मछली उत्पादन में लगातार आगे बढ़ रहा है. इस वित्तीय वर्ष में 47:47 हजार मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य हैं, जो पूरा हो जाना चाहिए.
मत्स्य पालकों (मत्स्य किसानों) को लेकर कई योजनाएं चलाई जा रही है. यहां के मछलियों की ब्रांडिंग को लेकर भी प्रयास जारी है.
वहीं मछली पालक को बीमा का लाभ मिल सकता है. जिला मत्स्य पदाधिकारी, लाल बहादुर साफी ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना, जलीय कृषि बीमा सुरक्षित उत्पादन, सुनिश्चित आय, का लाभ मत्स्य पालक किसान उठा सकते हैं.
अगर एक तालाब-पोखर में एक हजार मत्स्य बीज डाले जाएंगे, तो दो हजार रुपये का बीमा कराना होगा.
अगर किसी कारणवश (प्राकृतिक आपदा आदि) ये मछलियां मर जाती है, तो संबंधित मत्स्य पालक किसान को 40 हजार रुपये की बीमा राशि मिलेगी. जो उनके बैंक खाते से सीधे भेजी जाएगी. पाच आनलाइन आवेदन प्राप्त हुए है.
दूसरी ओर मत्स्य पालक किसानों को केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) का भी लाभदिया जा रहा है. विभाग को इससे सबंधित दो सौ आवेदन प्राप्त हुए है.











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