नई दिल्ली. कई बार ऐसा होता है कि जब पशु का तापमान घट या बढ़ जाता है. ऐसे में पशु खाना छोड़ देते हैं. इससे उनकी सेहत पर असर पड़ सकता है. जबकि उनका उत्पादन भी प्रभावित होता है. ऐसे में सबसे पहले ये करें कि थर्मामीटर से पशु का तापमान चेक करें. यदि गाय-भैंस का सामान्य तापमान लगभग 101.5°F से ज्यादा कम है तो दिक्कत है. इलाज शुरू करने से पहले थर्मामीटर से यह देखना जरूरी है कि ठंड लगने से पशु का तापमान घट गया है या बुखार के कारण बढ़ गया है, क्योंकि दोनों स्थितियों में दवाएं अलग-अलग दी जाती हैं. यदि तापमान बढ़ा हुआ है तो पशु को बुखार हो सकता है. वहीं पशु को ठंड लगती ह
जब पशु का तापमान 103 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर चला जाए तो यह मान लें कि तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया है. ऐसी स्थिति में पशु के सिर और शरीर पर ताजा ठंडे पानी की पट्टियां रखना चाहिए. एक्सपर्ट कहते हैं कि ठंडे पानी से नहलाना भी बेहतर रहता है. डेयरी फॉर्म में पंखे या कूलर की व्यवस्था कर देनी चाहिए.
इससे उसे आराम मिलेगा
वहीं इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम क्लोराइड, पोटेशियम क्लोराइड, कैल्शियम, लैक्टो युक्त घोल पानी में मिलाकर पशु को दें. इससे उसे आराम मिलेगा.
शरीर में ठंडक और एनर्जी बनाए रखने के लिए नींबू का रस, नमक और विटामिन सी भी पानी में मिलाकर दिया जा सकता है.
तापमान कम करने के लिए पशु चिकित्सा की सलाह पर वेटाजिन इंजेक्शन बड़े पशुओं में 25 से 30 एमएल दे सकते हैं. पैरासिटामोल और बोलस का उपयोग भी किया जाता है.
वहीं जब पशु का तापमान 90 डिग्री से कम हो जाए या उसके आसपास रहे तो यह स्थिति बेहद खतरनाक है.
तुरंत किसी पशु चिकित्सक को बुलाएं. तापमान बहुत नीचे जाने पर सिर्फ घरेलू उपाय या कैल्शियम घोल से काम नहीं चलता है. डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
तापमान कम होने की स्थिति में पशु को कैल्शियम का इंजेक्शन इंस्टा मस्कुलर दिया जाता है, लेकिन इसमें भी पशु चिकित्सक की सलाह जरूरी है.
पशु को सूखे और गर्म स्थान पर रखना चाहिए. उस पर कंबल या बोरी डालें. ताकि शरीर को गर्मी मिल सके और उसके शरीर में गर्मी बनी रहे.
निष्कर्ष
यदि पशु का टेंपरेचर घटता या बढ़ता है तो ऊपर बताई गई जानकारी के मुताबिक उपाय करें. इससे आप पशु पालन में खुद को नुकसान से बचा पाएंगे और उत्पादन भी प्रभावित नहीं होगा.










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