नई दिल्ली. जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है, इसका अहसास तो हम सभी को ही है. इस वजह से जनवरी के महीने में पशुओं का सही ध्यान नहीं रखा जाए तो बिना किसी बीमारी के भी ठंड के तनाव के कारण भैंस व गाय के दूध उत्पादन में गिरावट आना आम बात है. इसका प्रभाव खासकर भैंसों में ज्यादा होता है. डॉ. देवेंद्र यादव, वैज्ञानिक, लुवास ने बताया कि दूध उत्पादन की गिरावट से होने वाले आर्थिक नुकसान से पशुपालक कुछ जरूरी उपायों को अपनाकर बच सकते हैं. जिससे उन्हें पशुपालन के काम में फायदा होगा.
एक्सपर्ट का कहना है कि हरा चारा और प्रोटीन युक्त आहार देना पशुओं को शुरू कर दें. बता दें कि बरसीम में प्रोटीन अच्छी अनुपात में होता है, लेकिन पशुपालक पशुओं को बरसीम अकेले नहीं देना चाहिए. इसे गेहूं का भूसा या सूखी घास के साथ 50 अनुपात 50 अनुपात में मिलाकर दें. जई (ओट्स), राई ग्रास उत्कृष्ट ऊर्जा व संतुलित पोषण प्रदान करती हैं. 20 24 किलो प्रति पशु दिन में दे सकते हैं.
एक्सपर्ट का कहना है इसे सुबह की कटाई के बाद थोड़ा मुरझाने दें. ओस लगा हरा चारा न दें. हिसार, सिरसा, भिवानी में सरसों की हरी पत्ती (मूली सहित) ऊर्जा अच्छी प्रदान कर सकती हैं, लेकिन इसमें गॉइट्रोजेन होता है, जो अधिक मात्रा में नुकसानदेय हो सकता हैं.
इसे 4-6 किलो से ज्यादा न दें. अन्य चारे के साथ मिलाकर ही दें. साथ में पशुओं को पीने योग्य स्वच्छ एवं गर्म पानी जरूर दें.
यदि हरा चारा उपलब्ध न हो, ऐसी स्थिति में सूखा चारा (गेहूं का भूसा, बाजरा का कुट्टा) दे सकते हैं. इसमें ऊर्जा कम, रेशा ज्यादा होता है.
इसके साथ में 2-3 किलो दाना मिश्रण प्रति पशु प्रति दिन अवश्य दें। वहीं, दूध उत्पादन बनाएं रखने के लिए दाने में मक्का/ज्वार/गेहूं मात्रा बढ़ाएं.
प्रति लीटर दूध के हिसाब से 400-500 ग्राम दाना अवश्य दें. सर्दियों में भैंस को कभी भी ठंडा पानी न दें. पीने के लिए दिन में 3-4 बार गुनगुना पानी दें.
वहीं पशुओं के शेड की ऊंचाई 10 फीट से ऊपर रखें. सूखा बिस्तर जरूरी है. गेहूं का भूसा, धान की भूसी, या सूखी पत्तियां 6-7 इंच मोटी परत बिछाएं.
भैंसों के नवजात एवं छोटे बच्चों के लिए पशुबाड़े में फर्श सूखा रखें पानी की निकासी सही हो. गोबर-मूत्र का जमाव न होने दें.
दिन में धूप में पशुओं को बाहर बांधे. धूप से विटामिन डी मिलेगा और शरीर गर्म होगा. दोपहर में हल्की चहलकदमी (बाउंडिंग) कराएं.
इससे रक्त संचार बेहतर होगा और अंगुलियों व थन में सूजन कम होगी. थनों की मालिश व सफाई गुनगुने पानी से करें.
दुहने से पहले हाथ गर्म पानी से धोएं. सोने से पहले हल्का चारा (जैसे भूसा) दें. इसके पाचन से रातभर शरीर में गर्मी पैदा होती रहेगी.













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