नई दिल्ली. मिल्क फीवर पशुओं के लिए बेहद ही खतरनाक है. क्योंकि एक बार पशु को अगर मिल्क फीवर हो गया तो उसे उठने बैठने में दिक्कत होने लगती है. इतना ही पशु का शरीर ठंडा पड़ने लगता है और तो और दूध उत्पादन तो बिल्कुल ही गिर जाता है. इसके अलावा जेर न गिरने की वजह से और समय पर इलाज न मिलने के चलते पशु की 12 से 24 घंटे के अंदर मौत भी हो सकती है. जिससे पशुपालक को एक झटके में भारी नुकसान होता है. इसलिए मिल्क फीवर को बहुत ज्यादा हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह बड़ी गंभीर बीमारी है.
एनिमल एक्सपर्ट कहते हैं कि आमतौर पर ब्याने के बाद गाय या भैंस अचानक बैठ जाती है. कई बार पशुपालक समझते हैं कि थकावट की वजह से ऐसा हुआ है और सिर्फ कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि इस बात को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह जानलेवा मिल्क फीवर हो सकता है. ये बीमाारी गाय और भैंस दोनों को हो सकती है.
खून में कैल्शियम का स्तर कम होने से होती है ये बीमारी
एक्सपर्ट के मुताबिक मिल्क फीवर पशु के ब्याने के 24-48 घंटे के भीतर खून में कैल्शियम का स्तर कम होने की वजह से होता है.
बता दें कि इसमें शरीर का तापमान अचानक से बढ़ता नहीं, बल्कि सामान्य से कम हो सकता है.
शुरुआती लक्षण की बात की जाए तो पशु का बेचैन होना और सिर हिलाना है.
इसके बाद मांसपेशियों और पिछले पैरों में कंपन या थरथराहट शुरू हो जाती है.
पशु चलने में अनियंत्रित होने लगते हैं और पैर लड़खड़ाना शुरू कर देता है.
फिर पशु चारा खाना और जुगाली करना बंद कर देता है.
इसके बाद पशु का जमीन पर बैठ जाता है.
जमीन पर बैठ जाने के बाद पशु खड़ा नहीं हो पाता है.
गर्दन को मोड़कर अपनी कोख (Flank) पर रख लेता है.
पशु का कान, सींग, थूथन और पैर छूने पर ठंडा महसूस होता है.
आंखें स्थिर हो जाती है और पुतलियां फैलना शुरू हो जाती है.
पशु का पूरी तरह एक तरफ लेट जाता है.
पशु का पेट फूल जाता है.
सांस लेने में तकलीफ हो जाता है. वहीं भारी आवाज आना शुरू हो जाती है.
पशु का बेहोश होना आम बात है.
तुरंत इलाज न मिलने पर मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है.
निष्कर्ष
ये लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. वहीं कैल्शियम बोरोग्लूकोनेट से इलाज किया जाता है. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि इस बताए गए लक्षण दिखाई दें तो तुरंत ही पशु चिकित्सक से सपंर्क करें. इसमें लापरवाही न करें.










