नई दिल्ली. ठंड का आगाज हो चुका है. जैसे-जैसे दिसंबर का महीना आगे बढ़ेगा ठंड पशुओं को और परेशान करेगी. शीतलहर भी शुरू हो जाएगी और इसके बाद पशुपालकों को और ज्यादा पशुओं का ध्यान देना होगा. ऐसे में कुछ सावधानियां बरतनी होंगी, जिससे पशुपालन के काम में नुकसान से खुद को बचाया जा सकता है. बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग (Department of Animal and Fishery Resources) की ओर से इस बारे में अहम जानकारी साझा की गई. जिसको यहां लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) आपके लिए लाया है. आइए जानते हैं.
शीतलहर में पशु प्रबंधन की बात की जाए तो दुधारू पशुओं के लिए विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए. जैसे दूध निकालते समय गर्म पानी से थन धोकर सुखाना चाहिए. ठंडी हवा में दूध दोहन न करें. थन को सूजन से बचाने के लिए उसे साफ रखें.
पशुओं को खिलाएं-पिलाएं
एक्सपर्ट का कहना है कि शीतलहर में पानी को गुनगुना कर पशुओं को उपलब्ध कराएं.
यदि आप उन्हें ठंडा पानी पिलाते हैं तो जान लें कि बहुत ठंडा पानी पिलाने से पशु बीमार पड़ते हैं.
सुबह-शाम हल्का गुनगुना पानी जरूरी दें. पानी की टंकी ढककर रखें ताकि बर्फ जैसी ठंड न हो. वहीं गुनगुना पानी देना जरूरी है.
ठंड में ठंडा पानी देने से पशु पानी कम पीते हैं और इससे दूध घट जाता है.
इसलिए इस मौसम में हमेशा हल्का गुनगुना पानी दें. जिसका तापमान 20-25°C रख सकते हैं.
गुनगुना पानी देने से दूध बढ़ता है, पाचन अच्छा होता है और शरीर गर्म रहता है.
ठंड के मौसम में दुधारू पशुओं के खान-पान की बात करें तो उन्हें मिनरल मिक्सचर और नमक दें.
ठंड में शरीर की कार्यक्षमता कम होती है, इसलिए प्रतिदिन मिनरल मिक्सचर 50-60 ग्राम दें और 20-30 ग्राम नमक जरूर दें.
इससे शरीर में कैल्शियम, फॉस्फोरस और अन्य खनिजों की कमी नहीं होती है.
सूखे चारे के रूप में भूसा (गेहूं/धान), सूखी घास, चोकर आदि में 1-2% गुड़ या नमक मिलाकर खिलाएँ ताकि स्वाद भी बढ़े और ऊर्जा भी मिले.
सर्दी में सूखे चारे से ज्यादा गर्मी और पोषण देने वाले हरे चारे जैसे बरसीम, ओट (जई), मक्का चारा और थोड़ी मात्रा में गाजर-बथुआ-मैथी जैसे स्थानीय साग खिलाएं.
हरे चारे में पानी अधिक होता है, जिससे शरीर में हीट बैलेंस बना रहता है.










