नई दिल्ली. पशुपालन एक बेहतरीन काम है और इसे सरकार बढ़ावा भी दे रही है. ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान भाई इस काम को करके अपनी इनकम को बढ़ा सकें. यदि आप भी पशुपालन करना चाहते हैं या फिर कर रहे हैं तो आपके लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि पशुओं को किस तरह का चारा दिया जाए. जिससे पशु अच्छे से खाए और उसका उत्पादन बेहतर मिले. ताकि डेयरी फार्मिंग के बिजनेस में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा मिल सके. बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग (Department of Animal and Fishery Resources) की ओर से इसी बारे में जानकारी साझा की गई.
पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को बताया है कि पशुओं को किस तरह का चारा खिलाएं जिससे ज्यादा से ज्यादा फायदा उन्हें हो. चार किस्म के चारे में जानकारी दी गई है. आइए जानते हैं.
सूखा चारा
पशुओं को सूखे चारे के तौर पर भूसा, पुआल, सूखी घास खिला सकते हैं.
सूखे चारे का उपयोग पशुओं के लिए लंबे समय तक भंडारण के लिए किया जाता है.
सूखा चारा आंतों के कार्य को सही बनाए रखता है, फाइबर की पूर्ति करता है और हरे चारे की अनुपलब्धता में सहायक होता है.
विशेष आहार
आहार के इस रूप में साईलेज, गुड़, नमक आदि को शामिल किया जाता है.
साइलेज हरे चारे को एक प्रक्रिया से गुजारकर तैयार किया जाता है, जिससे इसमें लंबे समय तक पोषण बरकरार रहता है.
गुड़, नमक और अन्य पूरक आहार स्वाद बढ़ाने और खनिजों की पूर्ति के लिए दिया जाता है.
प्लांट आधारित पशु आहार
इसमें उच्च मात्रा में ऊर्जा, प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो दूध और मांस उत्पादन में सहायक होते हैं.
इसमें अनाज जैसे मक्का, जौ, बाजरा, गेहूं और खल्ली (सरसों खल्ली, मूंगफली खल्ली, तिल खल्ली) तथा दानेदार आहार जैसे पशु चारा पैलेट शामिल होते है.
खनिज और विटामिन सप्लीमेंट
खनिज और विटामिन सप्लीमेंट में कैल्शियम, फॉस्फोरस, कॉपर, आयोडीन विटामिन A, D, E से युक्त आहार शामिल है.
इनसे पशुओं की हड्डियों को मजबूती मिलती है और पोषण संबंधी कमी पूरी होती है.
इससे प्रजनन क्षमता बढ़ती है, दूध की गुणवत्ता में सुधार होता है और हड्डियां मजबूत बनती हैं.
निष्कर्ष
चारे के साथ पशुओं के चारे का बर्तन और खाने का स्थान साफ होना भी बेहद ही जरूरी है. वहीं समय-समय पर पशुओं को कृमिनाशक दवा देना भी जरूरी है.












