Home पशुपालन Dairy Animal: पशुओं को कैसे होता है अफरा, क्या हैं इसके लक्षण, जानें यहां
पशुपालन

Dairy Animal: पशुओं को कैसे होता है अफरा, क्या हैं इसके लक्षण, जानें यहां

अप्रैल महीने में भैंसे हीट में आती हैं और यह मौसम उनके गर्भाधान के लिए सही है. लेकिन इस बार अप्रैल के महीने में गर्मी अधिक है. ऐसे में गर्भाधान में प्रॉब्लम आ सकती है.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. पशुओं को कई बीमारियों से तकलीफ उठाना पड़ता है. जिससे पशुपालन के काम में भी नुकसान होता है. पशुओं की तमाम समस्याओं में अफरा की दिक्कत भी उन्हें बेहद परेशान करती है. पशुओं को अफरा तब होता है, जब उनके पेट में बहुत ज्यादा गैस बन जाती है और गैस पेट से बाहर भी नहीं निकल पाती है. जिसकी वजह से पशु सुस्त हो जाते हैं और उन्हें सांस लेने में भी तकलीफ होती है. इतना ही नहीं चारा खाना भी बंद कर देते हैं. इससे उत्पादन भी प्रभावित होता है.

बिहार सरकार के पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विभाग (Department of Animal and Fishery Resources) के एक्सपर्ट ने लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को बताया कि कई बार ज्यादा मात्रा में दलहनी या गीला हरा चारा खाने की वजह से अफरा की समस्या पशुओं में होती है. इतना ही नहीं दूषित आहार या आहार में अचानक से बदलाव कर देने के कारण भी अफरा की समस्या पशुओं को हो सकती है.

अफरा होने के क्या कारण हैं
अगर आप पशुओं को बासी या दूषित आहार खिलाते हैं तो इससे अफरा होने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. इसलिए दूषित या बासी आहार न दें.

कभी भी पशुओं के आहार में अचानक से बदलाव नहीं करना चाहिए. इससे उनके पेट की पाचन क्रिया प्रभावित होती है और उन्हें गैस बनने लगती है.

पशुओं को जरूरत से ज्यादा मात्रा में गीला, रसदार या दलहनी चारा नहीं खिलाना चाहिए. इससे उनके पेट में गैस बनती है और अफरा की शिकायत हो जाती है.

कई बार आलू या गोभी जैसी सब्जियों के कुछ टुकड़े पशुओं की भोजन नली में फंस जाते हैं. इससे भी पेट में गैस बनती है.

लक्षण क्या हैं
अगर पशु का पेट फूल जाए तो समझ जाइए कि उन्हें अफरा की शिकायत है. अगर उन्हें सांस लेने में दिक्कत आ रही है तो भी अफरा है.

पशु आहार का सेवन कम करने लगे या बंद कर दें तो अफरा का इलाज करना चाहिए. पेट के बाएं भाग में सूजन और ढोल जैसी आवाज आने पर भी अफरा हो जाता है.

निष्कर्ष
कुल मिला-जुला कर कहा जाए तो अफरा पशुओं के लिए खतरनाक है. इसलिए पशुओं की देखभाल सही से करना चाहिए और उन्हें अफरा से बचाने के उपाय करना चाहिए. ताकि पशु का उत्पादन प्रभावित न हो.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

पशुपालन

Animal News: जानवरों की इमरजेंसी देखभाल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन जिंदगी बचाना वाला है उपाय

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना ने...

careerपशुपालन

RAJUVAS: वेटरनरी यूनिवर्सिटी की परीक्षा 12 जुलाई को, प्री-पीजी के माध्यम से होगा इम्तिहान

नई दिल्ली. राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (RAJUVAS) में प्रवेश का...

animal husbandry
पशुपालनसरकारी स्की‍म

Scheme: नस्ल सुधार के लिए बकरी पालकों को बकरा दे रही है सरकार

नई दिल्ली. राजस्थान सरकार की तरफ से पशुपालन को बढ़ावा देने के...