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Animal: पशुओं को बाढ़ से बचाने के लिए आपदा नित्रंत्रण कक्ष की गई स्थापना

गोवंश के गोबर से संरक्षण केंद्र में बड़ा प्लांट संचालित होता है, जिससे जनरेटर के माध्यम से बिजली बनाई जाती है.
गोशाला में बैठी गाय.

नई दिल्ली. बरसात नजदीक है. बरसात जहां पशुओं को गर्मी से राहत देती है तो वहीं कई परेशानियां भी साथ लाती है. खासकर बिहार जैसे राज्य में तो बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रहता है. इसके चलते पशुपालकों को बहुत परेशानी होती है. बाढ़ की वजह पशुपालन करना मुश्किल हो जाता है. क्योंकि न तो पशुओं के लिए जरूरी चारा उपलब्ध हो पाता है और न ही साफ पानी मिल पाता है. ऐसे में बिहार सरकार की ओर बाढ़ से निपटने के लिए आपदा नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है. ताकि पशुपालकों की हर संभव मदद की जा सके.

बता दें कि संभावित बाढ़ से निपटने के मद्देनजर पशु स्वास्थ और उत्पादन संस्थान बिहार, पटना के पीछे में अवस्थित पशुपालन निदेशालय में आपदा नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गई है. यह नियंत्रण कक्ष सोमवार से शानिवार तक सुबह 8.00 बजे से शाम 7 बजे तक दो पालियों में संचालित किया जाएगा.

कर्मियों की भी हुई तैनाती
नियंत्रण कक्ष में पशु चिकित्सा पदाधिकारियों के अलावा सहायक कर्मियों की भी प्रतिनियुक्ति की गई है.

बाढ़ से पशुपालन संबंधी किसी प्रकार की शिकायत या फिर सुझाव नियंत्रण कक्ष में स्थापित दूरभाष संख्या 0612-2230942 एवं ई-मेल ahdapdabih@gmail.com पर दी जा सकती है.

डॉ. अनिल कुमार पाण्डेय, चारा विकास पदाधिकारी, बिहार नोडल पदाधिकारी (आपदा प्रबंधन) पशुपालन निदेशालय, बिहार, पटना आपदा नियंत्रण कक्ष के प्रभारी पदाधिकारी के रूप में नामित है.

सभी जिला पशुपालन पदाधिकारियों को भी जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित करने का आदेश दिया गया है.

राज्य वासियों या पशुपालकों से अनुरोध है कि बाढ़ की स्थिति में संबंधित जिला पशुपालन पदाधिकारी के साथ-साथ आपदा नियंत्रण कक्ष पर भी सम्पर्क स्थापित करें.

एहतियात भी जरूर बरतें
बिहार जिस राज्य में पशुपालन को बाढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित करती है. यहां पशु सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले तो किसी ऊंचे स्थानीय राहत शिवरों में जाना चाहिए.

यदि बाढ़ आ जाए तो पशुओं को पीने के लिए साफ पानी और खाने के लिए सूखा चारा का इंतजाम पहले से करना चाहिए.

बाढ़ का पानी उतरने के बाद शेड में चूना का छिड़काव करें और पशुओं का टीकाकरण शुरू करना चाहिए. इससे उन्हें बीमारियों से सेफ रखा जा सकता है.

पशुओं को बाढ़ से बचाने के लिए बिजली के तार को ठीक रखना चाहिए. आग लगने वाली वस्तुओं को भी दूर रखना चाहिए.

संक्रामक फैलने से रोकने के लिए स्वस्थ और बीमार पशुओं को अलग-अलग रखना भीतर होता है.

निष्कर्ष
बाढ़ का खतरा तो होता ही है. ऐसे में पहले से ही जरूरी उपाय कर लिए जाएं तो फिर पशुपालन में बाढ़ की वजह से नुकसान नहीं होगा.

Written by
Livestock Animal News Team

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