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Animal Husbandry: गर्मी में पशुओं को रहता है हीट स्ट्रेस का खतरा, यहां पढ़ें बचाव का तरीका

HF Cross Cow milk per day
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली. हर बार हही गर्मियों में तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे न इंसानों को ही नहीं बल्कि पशुओं को भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है. मार्च से जून के बीच हरियाणा के कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री से ऊपर चला जाता है. जिसे हीट-वेव (लू) कहा जाता है. इसके चलते इस भीषण गर्मी में पशु हांफता है तो यह हीट स्ट्रेस के लक्ष्य हो सकते हैं. ऐसे में सुबह-शाम ताजा पानी और ठंडा चारा खिलाना बेहतर उपाय है. हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र लुवास, के विस्तार विशेषज्ञ डॉ. सुजौय खन्ना ने बताया कि कई बार भीषण गर्मी से पशु की जान भी चली जाती है. हीट स्ट्रेस पशुओं को प्रभावित करता है. इसे रोकने के लिए उपाय किया जाना चाहिए.

अगर पशुओं में हीट स्ट्रेस के लक्षणों की बात की जाए तो तेज सांस लेना या हांफना, पानी पीने की मात्रा बढ़ना, भूख कम होना, सुस्ती या थकान, लार टपकना नाक का सूखना (निर्जलीकरण का संकेत) डार्यारया और बेहोशी की हालत होती है.

कैसे होता है हीट स्ट्रेस
बता दें कि जब तापमान सामान्य से 3 डिग्री से अधिक लगातार तीन या उससे अधिक दिनों तक बना रहता है, तो यह हीट-वेव कहलाता है. ऐसे में पशु शरीर से गर्मी निकालने के लिए ज्यादा सांस लेते हैं. अधिक पानी पीते हैं और कई बार खाने में भी रुचि नहीं लेते हैं. अत्यधिक गर्मी में उनका शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता और इससे उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है. ऐसे में शरीर को ठंडा करना बेहद ही जरूरी है. पशु को ट्यूबवेल के पानी से नहलाएं, नजदीकी पशु चिकित्सक को सूचना दें. शरीर का तापमान धीरे-धीरे कम करना चाहिए. फ्लूइड थेरेपी यदि पशु निर्जलित है, तो डॉक्टर की निगरानी में अंतःशिरा तरल दिए जाएं. तरल की मात्रा सावधानी से नियंत्रित होनी चाहिए.

हीट स्ट्रेस से बचाव के उपाय
ठंडक और छाया का इंतजाम करें. प्राकृतिक छाया जैसे पेड़-पौधों या कृत्रिम छाया (शेड, कपड़े आदि) की व्यवस्था करें. पशुओं को दिन के गर्म समय में छाया में रखें। खुली दीवारों और वेंटिलेशन वाली पशुशाला बनाएं. पंखे और पानी की व्यवस्था करें. पानी का छिड़काव करें. हालांकि जरूरत से ज्यादा पानी से बिस्तर गीला हो सकता है, जिससे थनैला और अन्य बीमारियां हो सकती हैं. इसलिए पानी ज्यादा न डालें. पशुशाला में अच्छी वेंटिलेशन होनी चाहिए. पशुओं को सुबह और शाम के ठंडे समय में चारा खिलाएं. उच्च गुणवत्ता वाला चारा और संतुलित राशन दें. चारा ताजा हो और उसमें पर्याप्त फाइबर होना चाहिए. कुल मिश्रित राशन (टीएमआर) देने से गर्मी का असर कम होता है। पर्याप्त पानी उपलब्ध कराएं.

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