नई दिल्ली. गुरु अंगद देव वेटनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के एक्सटेंशन एजुकेशन निदेशालय ने पंजाब के पशुपालन विभाग के सहयोग से राज्य के वेटनरी अधिकारियों के लिए बकरी, भेड़ और पोल्ट्री पर एक दिन की ‘मास्टर ट्रेनर्स’ वर्कशॉप आयोजित की. इस कार्यक्रम में पंजाब के विभिन्न जिलों के कुल 43 वेटनरी अधिकारियों ने भाग लिया. यहां आने वाले तमाम वेटनर अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में ट्रेंड किया गया, ताकि आगे चलकर फील्ड में वो दूसरे वेटनरी डॉक्टर को ट्रेनिंग दे सकें.
वाइस-चांसलर डॉ. जेपीएस गिल ने जोर देकर कहा कि जानवरों की बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ और पशुधन का टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने के लिए वेटनरी प्रोफेशनल्स की क्षमता का लगातार विकास जरूरी है. उन्होंने बताया कि इस तरह के व्यावहारिक और ज़रूरत-आधारित ट्रेनिंग प्रोग्राम वेटनरी अधिकारियों को अपनी तकनीकी जानकारी को अपडेट करने, नई तकनीकों को अपनाने और पशुधन क्षेत्र की बदलती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम बनाते हैं.
क्या-क्या सिखाया गयाा
एक्सटेंशन एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. आर एस ग्रेवाल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम वैज्ञानिक प्रगति और ज़मीनी स्तर पर उनके इस्तेमाल के बीच की दूरी को कम करते हैं, जिससे अंततः किसान समुदाय को लाभ होता है.
पंजाब के पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर (छोटे जुगाली करने वाले जानवर) डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि ये वेटनरी अधिकारी मास्टर ट्रेनर के तौर पर काम करेंगे और फील्ड में दूसरे वेटनरी डॉक्टरों और किसानों को ट्रेनिंग देंगे.
इस कार्यक्रम का संचालन वेटनरी और पशुपालन एक्सटेंशन एजुकेशन विभाग के प्रमुख डॉ. जसविंदर सिंह और डॉ. रवदीप सिंह ने किया.
वर्कशॉप में वेटनरी प्रैक्टिस के व्यावहारिक और फील्ड-ओरिएंटेड पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया.
जिसमें पोल्ट्री और सुअर में ब्लड सैंपलिंग की तकनीकें, यूरिनरी रुकावट का सर्जिकल इलाज, भेड़, बकरी, और पोल्ट्री की पोषण संबंधी जरूरतें, फ़ार्म इकोनॉमिक्स, छोटे जानवरों के लिए मानवीय यूथेनेशिया (दया-मृत्यु) के तरीके और स्टैंडर्ड पोस्टमार्टम प्रक्रियाएं शामिल थीं.
गौरतलब है कि इस तरह के ट्रेनिंग प्रोग्राम में अधिकारियों (पशु चिकित्सा अधिकारियों) को मुख्य रूप से पशु चिकित्सा, सर्जरी, और लाइवस्टॉक (पशुधन) प्रबंधन की विस्तृत ट्रेनिंग दी जाती है.
इनका उद्देश्य पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा के साथ-साथ संक्रामक रोगों को रोकना और पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराना है.
वेटनरी अधिकारियों को दी जाने वाली ट्रेनिंग को प्रमुख रूप से निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है.
ट्रेनिंग के दौरान विभिन्न पालतू और मवेशी जानवरों की बीमारियों की पहचान और उनके इलाज के बारे में जानकारी दी गई.
सर्जरी और गायनोकोलॉजी पशुओं का ऑपरेशन, प्रसव संबंधी जटिलताओं का समाधान और कृत्रिम गर्भाधान (AI)।पोषण और चारा प्रबंधन जानवरों के लिए संतुलित आहार और पोषण की ट्रेनिंग भी दी गई.










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