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Fisheries: मछुआरों के 100 गांवों का विकास करेगी केंद्र सरकार, केंद्रीय राज्य मंत्री ने किया ऐलान

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ड्रोन को उड़ाते केंद्रीय मंत्री और वहां मौजूद अन्य लोग.

नई दिल्ली. केंद्र सरकार देशभर में मछली पालन को बढ़ावा देने का काम कर रही है. इसी क्रम में सरकार ने मछुआरों की आजीविका को बढ़ाने और इसकी सेफ्टी के तहत 100 जलवायु अनुकूल तटीय गांवों का विकास करने की बात कही है. मछली पालन और एक्वाकल्चर में ड्रोन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और एग्जीबीशन पर कार्यशाला का उद्घाटन के मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने इसका ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि, भारत सरकार मछली पालन क्षेत्र को समग्र रूप से बदलने और देश में नीली क्रांति के माध्यम से आर्थिक सुधार और समृद्धि लाने में हमेशा सबसे आगे रही है. पिछले एक दशक में, मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 38,572 करोड़ रुपये का निवेश किया है.

उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) ने मत्स्यपालन और एक्वाकल्चर क्षेत्र में लगातार, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और समावेशी विकास को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया है. प्रमुख पहलों में आधुनिक एक्वाकल्चर तरीके, उपग्रह-आधारित निगरानी और मछली परिवहन, निगरानी और पर्यावरण निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक की हाल ही में की गई खोज शामिल है. कहा कि ड्रोन इस क्षेत्र में कई चुनौतियों के लिए कारगर है. पानी की सैंपलिंग, बीमारियों की पहचान और मछली फीड प्रबंधन इसके महत्वपूर्ण कार्यों में से एक हैं. इसका दायरा एक्वाकल्चर खेतों के प्रबंधन, मछली बिक्री की निगरानी, ​​मत्स्य पालन के बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का आकलन और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बचाव कार्यों तक भी फैला हुआ है. इसमें मछली पकड़ने और स्टॉक मूल्यांकन जैसी अन्य प्रमुख गतिविधियां शामिल हैं. इसके अलावा, ड्रोन पानी के अंदर मछलियों के व्यवहार की निगरानी कर सकते हैं और साथ ही संकट के संकेतों की भी निगरानी कर सकते हैं.

364 करोड़ रुपये का होगा निवेश
केंद्रीय राज्य मंत्री ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत 100 जलवायु-अनुकूल तटीय मछुआरों के गांवों के विकास की घोषणा की. जिसमें बुनियादी ढांचे को बढ़ाने और स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने के लिए प्रति गांव 2 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं. इस पहल का उद्देश्य मछली सुखाने के यार्ड, प्रोसेसिंग सेंटर और इमरजेंसी में राहत बचाव कार्य जैसी सुविधाएं प्रदान करके जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अनुकूलता में सुधार करना है. साथ ही समुद्री शैवाल की खेती और हरित ईंधन पहल जैसी जलवायु-अनुकूल प्रथाओं का समर्थन करना है. मंत्री ने विशेष रूप से आपदाओं के दौरान जलीय कृषि फार्मों और मत्स्य पालन बुनियादी ढांचे की निगरानी में ड्रोन प्रौद्योगिकी की भूमिका पर रोशनी डाली और कहा कि 364 करोड़ रुपये के निवेश से सटीक समय की ट्रैकिंग, मौसम की चेतावनी और संचार के लिए एक लाख मछली पकड़ने वाले जहाजों को ट्रांसपोंडर से लैस किया जाएगा.

टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर दिया जोर
संयुक्त सचिव (समुद्री) सुश्री नीतू कुमारी प्रसाद ने इस बात पर जोर दिया गया कि मछली पालन विभाग ने मछली पालन और एक्वाकल्चर क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग को लगातार बढ़ावा दिया है. विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इसने मछली उत्पादन को बढ़ावा देने, संसाधन प्रबंधन में सुधार और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए प्रगति की शुरुआत की है. इन पहलों के अनुरूप विभाग ने राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के सहयोग से कोलकाता के बैरकपुर में केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CIFRI) और बिहार के पटना में ज्ञान भवन सहित प्रमुख स्थानों पर ड्रोन प्रदर्शन आयोजित किए हैं. इससे पहले केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया और एक दिवसीय कार्यशाला के लिए संदर्भ निर्धारित किया. इसके बाद राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी डॉ. बीके बेहरा ने उद्घाटन भाषण दिया, जिसमें उन्होंने विभिन्न योजनाओं और पहलों पर प्रकाश डाला और मत्स्य पालन क्षेत्र के हितधारकों को इन लाभों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया.

मछली किसानों को योजनाओं के बारे में बताया
डॉ. वी.वी. सुरेश, मैरीकल्चर डिवीजन के प्रमुख और स्टार्टअप आईआरओवी टेक्नोलॉजीज़ प्राइवेट लिमिटेड ने मत्स्य पालन क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के अनुप्रयोग और इसकी चुनौतियों पर प्रस्तुति दी. “कैडलमिन बीएसएफ पीआरओ” के वितरण के बाद किसानों को सतत एक्वाकल्चर प्रथाओं के लिए डिज़ाइन किए गए विशेष रूप से तैयार की गई योजना के बारे में बताया गया. इसके अलावा, “ईजी सैलास सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एंड इनोवेशन ” नामक एक ब्रोशर लॉन्च किया गया, जिसमें समुद्री मछली माइक्रोबायोम और न्यूट्रिजेनोमिक्स के क्षेत्र में प्रमुख प्रगति और योगदान पर प्रकाश डाला गया. इस सत्र में मरीन बायोलॉजिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसबीओआई) नेशनल सिम्पोजियम का आधिकारिक शुरुआत भी हुई. जिसका उद्देश्य पूरे देश में समुद्री विज्ञान पेशेवरों के बीच सहयोग और ज्ञान को शेयर करना है.

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