Home डेयरी Animal Fodder: जई से तीन बार मिलता है चारा, यहां जानें कौन सी है बेहतरीन किस्म
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Animal Fodder: जई से तीन बार मिलता है चारा, यहां जानें कौन सी है बेहतरीन किस्म

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. जई का इस्तेमाल प्राचीन काल से हरे और सूखे चारे के रूप में किया जाता है. इससे अच्छे गुणों वाला साइलेज भी तैयार होता है. इसकी फसल से तीन कटाईयां तक प्राप्त हो जाती हैं. रबी में बरसीम के बाद जई का ही उत्तम स्थान है. जई की हरी पत्तियां प्रोटीन एवं विटामिन की धनी होती हैं. पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) के एक्सपर्ट का कहना है कि पशुओं को जई का चारा खिलाया जाए तो इससे उनका पाचन सुधरता है, जिससे ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन और खनिज मिलते हैं और दूध में फैट व एसएनएफ की मात्रा भी बहुत अच्छी हो जाती है.

एक्सपर्ट का तो यहां तक कहना है कि पशुओं के वजन और मांस की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाने के लिए जई बेहतरीन चार है. इसलिए पशुओं को जई का चारा जरूर खिलाना चाहिए.

जई की उन्नतशील प्रजातियां कौन सी हैं
जई की उन्नतशील प्रजातियों में कैन्ट, ओ.एस.-6 और ओ. एस.-7: यह प्रजातियाँ सम्पूर्ण भारत के लिए उपयुक्त हैं.

जिससे 40-57 टन हरा चारा प्रति हेक्टेयर हासिल होता है. इन प्रजातियों से एक से दो कटाईयां ली जाती हैं.

यूपीओ-94 और यूपीओ-212 प्रजातियां भी सम्पूर्ण भारत के लिए उपयुक्त हैं और यह बहुकटाई वाली किस्में हैं. जिनसे 45-57 टन प्रति हेक्ट, तक उत्पादन प्राप्त होता है.

इनके अलावा ओएल-9 उत्तर, उत्तर पश्चिमी एवं दक्षिणी पठार के लिए और बुन्देल जई (जेएचओ. 822 और 851) मध्य भारत के लिए उपयुक्त है जिनसे 40-50 टन हरा चारा प्रति हेक्ट. प्राप्त होता है.

जमीन की तैयारी ऐसे करें
खरीफ की कटाई के बाद पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से व 3-4 जुताईयां हैरो, कल्टीवेटर या देशी हल से करते हैं तथा हर बार पाटा लगाया जाता है.

बीज दर की बात की जाए तो 80-100 कि.ग्रा. बीज दर प्रति हेक्ट. थीरम/केप्टान कवकनाशी से उपचारित कर बोना चाहिए.

कम उपजाऊ वाली मिट्टी में बीज मात्रा अधिक प्रयोग करनी चाहिए. पंक्तियों के बीच का अन्तरण 20-25 से.मी. रखते हैं. बीज को 5-6 से.मी. गहराई पर नमी के सम्पर्क में बोते हैं.

Written by
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