नई दिल्ली. डेयरी फार्मिंग के काम में जहां दूध और इससे बनने वाले उत्पाद से कमाई होती है तो वहीं डेयरी किसानों के लिए डेयरी फार्मिंग के दौरान निकलने वाला वेस्ट एक परेशानी भी है. इसका सही से निस्तारण करना बेहद ही जरूरी है. क्योंकि डेयरी वेस्ट को अगर सीधे तालाब और नदियों में जाने दिया जाए तो इससे बड़ा नुकसान हो सकता है. हालांकि डेयरी वेस्ट की वैल्यू बढ़ाई जा सकती है और इससे डेयरी किसानों की इनकम भी बढ़ सकती है. बस जरूरत इस बात की है कि इसमें वैज्ञानिक तरीके का इस्तेमाल किया जाए.
इसी को लेकर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB ने सस्टेन प्लस एनर्जी फाउंडेशन (SPEF) के साथ मिलकर कोलकाता में NDDB-SPEF प्रोजेक्ट के दूसरे चरण के तहत ‘क्षेत्रीय हितधारक परामर्श कार्यशाला’ का आयोजन किया. इस कार्यशाला में राज्य सरकारों, डेयरी फेडरेशनों और दुग्ध संघों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और डेयरी क्षेत्र में स्थिरता और चक्रीयता (circularity) पर विचार-विमर्श किया.
8 करोड़ ग्रामीण परिवारों को मिलता है सहारा
NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश सी. शाह ने वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला को संबोधित करते हुए भारत के डेयरी क्षेत्र में स्थिरता और चक्रीयता के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला.
कहा कि यह क्षेत्र लगभग 8 करोड़ ग्रामीण परिवारों को सहारा देता है और इस प्रकार ग्रामीण आजीविका तथा महिला सशक्तिकरण से गहराई से जुड़ा हुआ है.
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वैज्ञानिक तरीके से खाद का प्रबंधन करके डेयरी से निकलने वाले कचरे को मूल्य-वर्धित संसाधनों में बदला जा सकता है.
साथ ही, इससे ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के नए अवसर भी पैदा होंगे.
उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र का भविष्य किसानों पर केंद्रित ऐसे ‘चक्रीय अर्थव्यवस्था मॉडल’ की ओर बढ़ना चाहिए. जिनका मुख्य उद्देश्य “कचरे से धन” (Waste to Wealth) बनाना हो.
उन्होंने ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के तहत डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से ऐसे प्रयासों को बड़े पैमाने पर लागू करने के प्रति NDDB की प्रतिबद्धता को दोहराया.
डॉ. शाह ने भारत की डेयरी सहकारी समितियों की परिवर्तनकारी शक्ति को भी रेखांकित किया और प्रधानमंत्री के विजजन के अनुरूप एक “चक्रीय डेयरी क्रांति” लाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया.
कार्यशाला को संबोधित करते हुए, पश्चिम बंगाल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड के MD डॉ. अभिजीत शेवाले ने ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने में सहकारी समितियों के नेतृत्व वाली चक्रीय डेयरी पहलों की भूमिका पर प्रकाश डाला.
वहीं, SPEF के CEO श्री गणेश नीलम ने NDDB और Sustain Plus की साझेदारी को एक रणनीतिक सहयोग बताया.
जिसका मुख्य उद्देश्य छोटे किसानों के लिए स्वच्छ ऊर्जा, वैज्ञानिक खाद प्रबंधन और सतत डेयरी विकास सुनिश्चित करना है.












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