नई दिल्ली. देश के अलग-अलग हिस्सों में डेयरी सेक्टर को मजबूत किया जा रहा है. ताकि इससे जुड़े लोगों को फायदा हो सके. इसी कड़ी में देश के अलग-अलग राज्यों में दूध उत्पादक संगठनों के साथ काम करने वाले वेटेरिनरी एक्सटेंशन वर्करों के लिए “प्रैक्टिकल डेयरी फार्मिंग” पर दो हफ़्ते का ट्रेनिंग प्रोग्राम गुरु अंगद देव वेटेरिनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना में शुरू हुआ. इस ट्रेनिंग में नौ अलग-अलग राज्यों के कुल 20 वेटेरिनरी एक्सटेंशन वर्कर हिस्सा ले रहे हैं. जहां उन्हें काफी कुछ सीखने को मिल रहा है.
यह ट्रेनिंग प्रोग्राम एक्सटेंशन डिपार्टमेंट और NDDB डेयरी सर्विसेज (NDS), जो नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनी है ने मिलकर आयोजित किया है. इस पहल का मकसद पंजाब की सफल तकनीकों और मैनेजमेंट के तरीकों को दूसरे राज्यों में अपनाकर पूरे भारत में कमर्शियल और टिकाऊ डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देना है.
मॉडल को पूरे देश में लागू करने की जरूरत है
यूनिवर्सिटी के एक्सटेंशन विंग और NDS की कोशिशों की तारीफ़ करते हुए, वाइस-चांसलर डॉ. जे.पी.एस. गिल ने बताया कि वेट यूनिवर्सिटी देश की सबसे बेहतरीन वेटेरिनरी यूनिवर्सिटी में से एक है और अच्छी शिक्षा और एक्सटेंशन सर्विस देने के लिए जानी-मानी जगह है.
एक्सटेंशन एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने बताया कि डेयरी प्रोडक्शन और हाई टेक्नोलॉजी अपनाने के मामले में पंजाब के किसान दूसरे राज्यों के लिए रोल मॉडल हैं.
उन्होंने कहा कि अब इस सफल मॉडल को पूरे देश में लागू करने की जरूरत है. ताकि अन्य राज्य के लोगों को भी इसका फायदा पहुंच सके.
NDDB डेयरी सर्विसेज के PIB हेड डॉ. वीनू सोधी ने यूनिवर्सिटी से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें बातचीत, सवाल-जवाब और अनुभव साझा करके गहराई से सीखने के लिए प्रोत्साहित किया.
बानी मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइज़ेशन के CEO डॉ. नवदीप धाम ने पंजाब के मुकाबले दूसरे राज्यों की जमीनी स्थिति के बारे में बताया.
जिससे इन एक्सटेंशन वर्करों को ज़्यादा प्रैक्टिकल जानकारी देने की ज़रूरत महसूस हुई। NDS के सीनियर एक्सपर्ट डॉ. सी.बी. सिंह भी मौजूद थे.
वेटेरिनरी एंड एनिमल हसबेंडरी एक्सटेंशन एजुकेशन डिपार्टमेंट के हेड और कोर्स डायरेक्टर डॉ. जसविंदर सिंह ने बताया कि यह ट्रेनिंग मुख्य रूप से डेयरी फार्मिंग के प्रैक्टिकल पहलुओं पर केंद्रित होगी.
ताकि ये एक्सटेंशन वर्कर इतने जानकार बन सकें कि डेयरी फार्मिंग समुदाय के लिए बदलाव लाने वाले और फ्रंट-लाइन सपोर्ट के तौर पर काम कर सकें.
अगले दो हफ़्तों तक डॉ. अक्षिता चड्ढा और डॉ. रविदीप सिंह इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का कोऑर्डिनेशन करेंगे. प्रोफेसर डॉ. राजेश कसरीजा ने इस ट्रेनिंग के आयोजन में सहयोग के लिए सभी का धन्यवाद किया.












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