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Dairy: मीनेश शाह ने कहा- बायोगैस से ईंधन पर निर्भरता होगी कम, डेयरी किसानों की बढ़ेगी इनकम

विचार व्यक्त करते एनडीडीबी अध्यक्ष, डॉ. मीनेश शाह.

नई दिल्ली. एनडीडीबी अध्यक्ष, डॉ. मीनेश शाह ने आज ग्रेटर नोएडा में आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय बायोएनर्जी एवं टेक्नोलॉजी सम्मेलन (IBET Expo 2026) में सभा में दिए गए अपने संबोधन में डॉ. शाह ने एनडीडीबी द्वारा क्रियान्वित विभिन्न बायोगैस मॉडलों का जिक्र किया. उन्होंने इस दौरान वाराणसी दुग्ध संघ Parag Dairy Varanasi परिसर में स्थापित देश के पहले केंद्रीकृत गोबर-आधारित बायोगैस संयंत्र का उदाहरण दिया, जहां पर हर दिन 4 हजार घन मीटर बायोगैस का उत्पादन किया जाता है. इस दौरान उन्होंने इसके फायदे भी वहां मौजूद लोगों को गिनाए.

उन्होंने कहा कि लगभग 100 मीट्रिक टन गोबर से उत्पादित बायोगैस डेयरी की थर्मल और विद्युत ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करता है. साथ ही जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) पर निर्भरता व प्रोसेसिंग लागत कम करने तथा किसानों को अतिरिक्त आय देने में सहायक है.

वाराणसी में सस्ती दरों पर मिल रही है रसोई गैस
उन्होंने वाराणसी के अकौनी गांव के सामुदायिक मॉडल का भी उल्लेख किया, जहां लगभग 200 घन मीटर प्रतिदिन क्षमता वाला प्लांट लगा है.

इस प्लांट से पाइपलाइन द्वारा स्थानीय परिवारों को LPG की तुलना में आधे से भी कम लागत पर स्वच्छ रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है.

बनास डेयरी और सुजुकी के सहयोग से बनासकांठा में क्रियान्वित मॉडल में गोबर से CBG तैयार कर वाहन ईंधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है.

जबकि यही पर स्लरी से जैविक उर्वरक तैयार होता है. उन्होंने 2 घनमीटर क्षमता वाले घरेलू संयंत्रों का भी उल्लेख किया.

जिन्हें महिला किसान अपने घर में स्थापित कर स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन के रूप में उपयोग कर रही हैं.

डॉ. शाह ने कहा कि बायो एनर्जी को केवल ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि एक व्यापक nutrient recovery system के रूप में देखा जाना चाहिए.

क्योंकि इन सभी मॉडलों से प्राप्त स्लरी का उपयोग जैविक उर्वरकों (FOM, PROM, LFOM) के निर्माण में किया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में, उन्होंने राज्य के विशाल गोवंश आधार और लगभग 500 वृहद गौ संरक्षण केंद्रों को लेकर विचार रखा.

इस बारे में कहा उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा एवं जैविक उर्वरक उत्पादन के केंद्रों में बदलने की महत्वपूर्ण संभावना को रेखांकित किया.

उन्होंने अलग-अलग संयंत्रों से आगे बढ़कर एक एकीकृत ग्रामीण जैव-अर्थव्यवस्था प्रणाली की दिशा में काम करने पर बल दिया.

जहां डेयरी क्लस्टर गोबर संग्रहण, ऊर्जा उत्पादन और जैविक उर्वरक निर्माण का साझा केंद्र बन सकें.

कार्यक्रम के अंत में डॉ. शाह ने कहा कि भारत की बायो एनर्जी जर्नी के बारे में कहा कि अब एक नए और अधिक व्यापक चरण में प्रवेश कर रही है.

जहां कृषि व डेयरी प्रणाली को अधिक सस्टेनेबल बनाना तथा अपशिष्ट को संपदा (waste to wealth) के रूप में देखना हमारा साझा लक्ष्य होना चाहिए.

Written by
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