Home डेयरी Dairy: अदिवासियों को डेयरी फार्मिंग के लिए प्रेरित कर रही है सरकार, सब्सिडी पर मुर्रा भैंस और गाय दे रही
डेयरीसरकारी स्की‍म

Dairy: अदिवासियों को डेयरी फार्मिंग के लिए प्रेरित कर रही है सरकार, सब्सिडी पर मुर्रा भैंस और गाय दे रही

cow and buffalo farming
प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश की सरकार ये बात कई बार कह चुकी है कि राज्य को मिल्क कैपिटल बनाया जाएगा. राज्य को मिल्क कैपिटल बनाने से जहां राज्य में दूध उत्पादन बहुत ज्यादा होगा तो वहीं इससे डेयरी किसानों की इनकम में भी इजाफा होगा. जबकि राज्य के लोगों को अच्छी क्वालिटी का दूध भी मुहैया होगा. जिसको लेकर सरकार अदिवासी पशुपालकों को भी डेयरी फार्मिंग के लिए प्रेरित कर रही है. ताकि उनकी इनकम को बढ़ाने के साथ-साथ राज्य में दूध उत्पादन को भी बढ़ाया जाए. ताकि लोगों को इसका फायदा हो सके.

असल में सरकार 90 फीसद अनुदान पर मुर्रा भैंस और गाय दे रही है. मुर्रा भैंस ज्यादा दूध उत्पादन करने के लिए जानी जाती है. इससे भी राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. वहीं जिन किसानों के पास पशु नहीं है वो सरकारी सब्सिडी का फायदा उठाकर भैंस या गाय पालन करके अच्छी कमाई कर सकते हैं.

पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर विशेष फोकस
मध्य प्रदेश सरकार आदिवासी और अति पिछड़े समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर विशेष फोकस कर रही है.

सरकार का मानना है कि देयरी ग्रामीण और आदिवसी क्षेत्रों में रोजगार और आय का मजबूत माध्यम बन सकता है.

इसी उद्देश्य से प्रदेश के 14 जिलों में तमाम अदिवासी जनजातियों के पशुपालकों के लिए ‘मुख्यमंत्री दुधारू पशुयोजना संचालित की जा रही है.

योजना के तहत पत्र पशुपालकों को 90 प्रतिशत अनुदान पर दो-दो मुर्य भैंस या गाय उपलब्ध कराई जा रही है.

सरकार का उद्देश्य है कि आदिवासी परिवार पशुपालन के जरिए नियमित आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकें.

भैंस और उन्नत नस्ल की गायों को अधिक दूध उत्पादन के लिए जाना जाता है. ऐसे में योजस से जुड़ने वाले पशुपालकों को बेहतर दूध उत्पादन और आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है.

सरकार डेयरी क्षेत्र को केवल शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती, यीिक गांवों और आदिवासी इलाकों तक इसका विस्तार कर रही है.

इसी दिशा में मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर विदिशा और रायसेन जिलों में संचालित किया जा रहा है.

पशुपालन विभाग के मुताबिक योजनाओं का उद्देश्य केवल पशु उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पशुपालकों को स्थायी आय का साधन देना है.

सरकार पशुपालकों को डेयरी गतिविधियों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की दिशा में काम कर रही है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

Animal Husbandry: Farmers will be able to buy vaccines made from the semen of M-29 buffalo clone, buffalo will give 29 liters of milk at one go.
डेयरी

Dairy: डेयरी फार्मिंग में नुकसान नहीं चाहते तो पशु की ठंड से बचाव की अभी से शुरू कर दें तैयारी

नई दिल्ली. डेयरी एक्सपर्ट कहते हैं कि सर्दियों के मौसम में दुधारू...

मछली पालनसरकारी स्की‍म

Fish Farming Scheme: बिना टेंशन करिए मछली पालन, नुकसान होगा तो सरकार करेगी मदद

नई दिल्ली. बाढ़, चक्रवात, जल प्रदूषण और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण...

This scheme aims at the development and conservation of indigenous breeds, genetic upgradation of bovine population, enhancement of milk production and productivity of bovines thereby making dairying more remunerative to farmers. The following steps have been undertaken under the scheme.
डेयरी

Milk Production: गिर की एचएफ क्रॉस गाय पालिए, एक गाय मुश्किल मौसम में भी देगी 25 लीटर दूध

नई दिल्ली. कई डेयरी फार्मर ऐसे हैं, जो डेयरी फार्मिंग में अच्छी...