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Dairy: डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड और बेहतर बनाने पर दिया जाएगा जोर

This scheme aims at the development and conservation of indigenous breeds, genetic upgradation of bovine population, enhancement of milk production and productivity of bovines thereby making dairying more remunerative to farmers. The following steps have been undertaken under the scheme.
दूध की प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. मुंबई में ‘कोऑपरेटिव्स के जरिए डेयरी (DTC) – JICA’ प्रोजेक्ट के तहत एक रीजनल वर्कशॉप हुई. यह प्रोजेक्ट भारत सरकार के डेयरी विकास के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम के कंपोनेंट B के तहत JICA (जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी) की मदद से चलाया जा रहा है. इस वर्कशॉप में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा के कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन और मिल्क यूनियनों ने हिस्सा लिया. इसमें स्कीम के प्रस्तावित दूसरे चरण (Phase-II) और भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (FAHD मंत्रालय) की डेयरी विकास से जुड़ी अन्य पहलों पर चर्चा की गई.

इस वर्कशॉप में पशुपालन और डेयरी विभाग की डायरेक्टर पूजा रुस्तगी, इसी विभाग के डिप्टी कमिश्नर (DD) दयानंद सावंत, NDDB के SGM डॉ. जी. किशोर, NDDB के GM (SA&P) डॉ. जिग्नेश शाह, NDDB मुंबई के रीजनल हेड (वेस्टर्न रीजन) वी. श्रीनिवास और NDDB के अन्य सीनियर अधिकारी शामिल हुए और डेयरी सेक्टर की मजबती पर चर्चा की गई.

कामयाबियों की हुई समीक्षा
वर्कशॉप में मध्य प्रदेश में DTC–JICA के पहले चरण (Phase I) के लागू होने और उससे मिली कामयाबियों की समीक्षा की गई.

इसमें डेयरी वैल्यू चेन से जुड़े अहम कामों, सफलताओं की कहानियों, चुनौतियों और सीखों पर बात की गई.

चर्चा का मुख्य फोकस JICA के दूसरे चरण (Phase II) के रोडमैप पर था, जिसे पूरे भारत में लागू करने का प्रस्ताव है.

इसमें CBG और खाद प्रबंधन के लिए अतिरिक्त फंडिंग और सपोर्ट की बात भी शामिल है.

स्कीम की डिटेल्स, जैसे प्रस्तावित कंपोनेंट, फंडिंग का तरीका, योग्यता के नियम और डेयरी सेक्टर के लिए एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क पर भी चर्चा हुई.

DAHD की डायरेक्टर पूजा रुस्तगी ने अपने संबोधन में डेयरी कोऑपरेटिव्स को सुझाव दिया कि वे भारत से डेयरी प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में हिस्सेदारी बढ़ाने के संभावित तरीकों पर ध्यान दें.

उन्होंने डेयरी सेक्टर में सर्कुलैरिटी और सस्टेनेबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए एनर्जी-एफिशिएंट और पर्यावरण के अनुकूल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड और बेहतर बनाने पर जोर दिया.

वर्कशॉप में ‘श्वेत क्रांति 2.0’ (White Revolution 2.0) के तहत नई DCS (डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटी) बनाने और मौजूदा DCS को मज़बूत करने के लिए राज्य-वार लक्ष्यों और उपलब्धियों पर भी बात की गई.

साथ ही, NDLM के तहत ‘डेयरी विकास पोर्टल’ के डेटा एंट्री प्रोसेस और फीचर्स के बारे में भी जानकारी दी गई.

वर्कशॉप के दौरान प्रतिभागियों ने कीमती फीडबैक और सुझाव दिए, जो JICA स्कीम के दूसरे चरण का फ्रेमवर्क तैयार करने में मददगार साबित होंगे.

Written by
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