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AI: क्यों कराना चाहिए पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान, इसके फायदे क्या हैं, ये भी पढ़ें

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प्रतीकात्मक फोटो:

नई दिल्ली. सरकार पशुपालन को बढ़ावा दे रही है. इसके लिए कृत्रिम गर्भाधान (AI) को भी बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है. ताकि किसानों के पास उच्च क्वालिटी के पशु हों और वो अच्छा उत्पादन करके किसानों को फायदा पहुंचा सकें. सरकार की ओर से कृत्रिम गर्भाधान के लिए राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम भी शुरू किया गया है. जिसके तहत कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम (एनएआईपी) की शुरुआत 50 फीसदी से कम एआई कवरेज वाले 604 जिलों में किसानों के दरवाजे पर मुफ्त गुणवत्ता वाली कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं प्रदान करने के लिए की गई है. ताकि किसानों को अच्छी क्वालिटी के सीमेन के लिए भटकना न पड़े.

पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान (AI) बहुत महंगा भी नहीं है. इससे कराने की लागत अलग-अलग हो सकती है, लेकिन आमतौर पर सरकारी स्तर पर 30 रुपये से 100 रुपये प्रति गाय या भैंस की कीमत तय की गई है. बता दें कि कुछ मामलों में, कृत्रिम गर्भाधान के लिए अनुदान भी उपलब्ध है, जिससे पशुपालकों को कम कीमत पर ये सर्विस मिल जाती है.

कृत्रिम गर्भाधान क्या है

  • कृत्रिम गर्भाधान एक आधुनिक तकनीक जिसमें नर पशु के सीमने को विशेष विधि द्वारा एकत्र कर मादा पशु के गर्भाशय में कृत्रिम रूप से स्थापित किया जाता है.
  • यह तकनीक पशुओं के नस्ल को सुधारने दूध उत्पादन बढ़ाने और विभिन्न रोगों से बचाव करने के लिए अपनाई जाती है.

कृत्रिम गर्भाधान की प्रक्रिया

  • उत्तम नस्ल के नर पशु का चयन किया जाता है.
  • चुने गए नर पशु से विशेष विधियों से वीर्य संग्रह किया जाता है.
  • इस दौरान सीमने की गुणवत्ता का परीक्षण भी होता है.
  • विशेष इंजेक्शन या उपकरणों द्वारा मादा पशु में गर्भाधान किया जाता है.

कृत्रिम गर्भाधान के फायदे

  • कम दूध देने वाले देशी नस्लों में तेजी से नस्ल सुधार होता है.
  • एक उन्नत नस्ल के सांड़ से एक बार इकट्ठा किए गए वीर्य से बहुत सारी गायों को गर्भित कर सकते हैं.
  • कृत्रिम गर्भाधान से पशुओं के जननांगों में बीमारी फैलने की संभावना नहीं रहती है.
  • पशु के सीमेन को हम अपनी जरूरत के मुताबिक कहीं भी और किसी भी समय ले जा सकते हैं या जब जरूरत हो उसे प्रयोग कर सकते हैं.

गर्मी का दुधारू पशुओं पर प्रभाव रोगों का खतरा
ये भी जान लें कि गर्मी और उमस में मच्छर, मक्खियां और बैक्टीरिया अधिक सक्रिय हो जाते हैं। इससे थनैला, दस्त, खुरपका-मुँहपका, त्वचा रोग आदि का खतरा बढ़ जाता है. जबकि ज्यादा गर्मी और लू लगने से कुछ मामलों में पशु की मृत्यु तक हो सकती है, विशेषकर यदि तुरंत राहत न मिले.

Written by
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