नई दिल्ली. भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), इज्जतनगर में भारतीय मीट विज्ञान संघ के 13वें राष्ट्रीय सम्मेलन और राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरुआत हुई. जहां पहले दिन डिसीज फ्री मीट उत्पादन पर फोकस किया गया. गौरतलब है कि भारत में तकरीबन 70 फीसद से ज्यादा लोग नॉन वेजेटेरियन है. ऐसे में लोगों को तमाम पोषक तत्वों से भरपूर मीट मिले और वो मीट हैल्दी, हाइजेनिक और खासतौर पर डिसीज फ्री हो, इसके लिए अगले साल भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान एक कोर्स की शुरुआत करने जा रहा है. इसका ऐलान पहले दिन किया गया है.
ये पूरा कार्यक्रम मीट की प्रोसेसिंग, मीट की पैकेजिंग और मीट के उत्पादन पर ही चर्चा और तमाम रिसर्च रिपोर्ट के लिए आयोजित किया गया है. आईवीआरआई ने इस बात का ऐलान किया है कि वन हैल्थ मिशन के नाम से एक कोर्स शुरू किया जाएगा, जिसमें जानवरों से इंसानों में होने वाली जूनोटिक डिसीज पर कंट्रोल करने के लिए तमाम चीजों के बारे में बताया जाएगा.
कैसे दूर होगी सेक्टर की चुनौतियां
बताया गया कि कैसे मीट को हैल्दी, हाइजेनिक और डिसीज फ्री बनाया जाए, कोर्स में ये सिखाया जाएगा. पशुपालन से लेकर मीट उत्पादन तक की हर एक बारीकी के बारे में इसमें जानकारी होगी.
कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक चयन बोर्ड के चेयरमैन डॉ. संजय कुमार ने कहा कि भारत के पशु उत्पाद और मीट सेक्टर के लिए स्मार्ट मीट सिस्टम, ट्रैसेबिलिटी, फ्रंटियर टेक्नोलॉजी और वैश्विक प्रोटीन क्रांति महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई है.
उन्होंने कहा कि विकसित देशों की तरह भारत को भी ट्रेसेबिलिटी, बायो–इकोनॉमी, सेल–बेस्ड मीट, वैकल्पिक प्रोटीन, ब्लॉकचेन और एआई–आधारित प्रसंस्करण अपनाकर विश्व बाजार में अपनी पहचान बनानी होगी.
संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. एसके. मेंदिरत्ता ने कहा कि मीट सेक्टर में उभरती अत्याधुनिक तकनीकों को आगे बढ़ाना और भारत को प्रोटीन सुरक्षा की ओर मजबूत कदमों से आगे ले जाना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि सेक्टर की चुनौतियों को दूर करने के लिए उत्पादकता में वृद्धि, उपलब्धता, आधारभूत ढाँचे की मजबूती, तकनीक का समावेशन, स्टार्टअप और इनोवेशन को प्राथमिकता देना जरूरी है.

इंडियन मीट साइंस एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. पी.के. मंडल ने कहा कि आईएमएसए का प्रतिनिधित्व करते हुए खुश हूं.
आज इसके 800 से अधिक आजीवन सदस्य हैं, जो मांस क्षेत्र में शोध, प्रशिक्षण, सहयोग और नीतिगत समर्थन को सशक्त बनाते हैं.
निष्कर्ष
जानकारों ने कहा कि इस नए कोर्स की शुरुआत से मीट उत्पादन और बेहतर बनाया जा सकेगा. इससे मीट प्रोडक्शन क्वालिटी वाला होगा. जिसका फायदा आम जनता को होगा.












