Home पोल्ट्री Poultry Farming Tips: मुर्गी पालन नहीं करना चाहते हैं तो पालें बत्तख, इसमें है तगड़ा मुनाफा
पोल्ट्री

Poultry Farming Tips: मुर्गी पालन नहीं करना चाहते हैं तो पालें बत्तख, इसमें है तगड़ा मुनाफा

बत्तख की तीन नस्लें.

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में मुर्गी पालन के अलावा बत्तख पालन भी किया जाता है. बहुत से पोल्ट्री फार्मर्स बत्तख पालन करके अच्छी कमाई कर रहे हैं. क्योंकि मुर्गियों के लिए पक्का शेड बनाना पड़ता है, जिसमें हीटर, पंखे, फोगर और तापमान नियंत्रण की व्यवस्था करनी पड़ती है. वहीं मौसम में उतार-चढ़ाव आते ही मुर्गियां तनाव में आ जाती हैं. जबकि बतख पालन में महंगे शेड की आवश्यकता नहीं होती है. बांस, साधारण छप्पर या जालीदार बाड़े में भी इन्हें आसानी से पाला जा सकता है. बतख पालन के लिए बहुत बड़े तालाब की जरूरत नहीं होती, एक छोटा गड्ढा या पानी का हौज भी पर्याप्त होता है.

बीमा​रियों की बात करें तो मुर्गी पालन में रानीखेत, बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों का अत्यधिक जोखिम रहता है, जिससे पूरा फार्म खाली हो सकता है. इसलिए नियमित टीके (वैक्सीन) और एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ती है. वहीं बतखों की प्राकृतिक इम्युनिटी मुर्गियों से लगभग 10 गुना ज्यादा और चमड़ी मोटी होती है, जिससे सामान्य बीमारियां इन्हें नहीं लगतीं. इन्हें बार-बार टीके लगाने की परेशानी नहीं होती और मृत्यु दर 2 फीसद से भी कम रहती है.

मुर्गियों के दाने पर ज्यादा होता है खर्च
मुर्गियों को 90 फीसद दाना बाजार से खरीदकर कमर्शियल फीड के रूप में देना पड़ता है, जिससे कुल लागत का लगभग 70 फीसद केवल दाने में चला जाता है.

जबकि बतख पालन में बतखें पानी, खेत या दलदली जगह में कीड़े, घोंघे (Snails), छोटे मेंढक और बची फसलें खाकर अपना लगभग 50 फीसद पेट खुद भर लेती हैं.

साथ ही बत्तखों को रसोई का जूठन, सब्जियों के छिलके और सस्ता अनाज देकर दाने का खर्च काफी घटाया जा सकता है.

मुर्गी साल में लगभग 280 से 300 अंडे देती है. एक अंडे का वजन 50-55 ग्राम होता है. मुर्गी का लगभग 1.5 साल बाद अंडा उत्पादन तेजी से घट जाता है.

बतख साल में 300 से 330 अंडे देती है. बतख का अंडा मुर्गी के अंडे से 15-20 ग्राम बड़ा और अधिक पौष्टिक होता है. बतख लगातार 2 से 3 साल तक अच्छा अंडा उत्पादन देती है.

मुर्गी का अंडा बाजार में आसानी से 6 से 10 में बिक जाता है, लेकिन दाने की अधिक लागत और भारी प्रतिस्पर्धा के कारण प्रति अंडा सिर्फ 1 से 2 का मुनाफा बचता है.

बतख का अंडा आकार और पोषण के कारण 10 से 15 रुपए प्रति पीस तक बिकता है.

जबकि इसका मांस भी ब्रॉयलर से महंगा बिकता है. विशेषकर दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल में इसकी भारी मांग है.

निष्कर्ष
यदि आपके पास अच्छा बजट है, दैनिक देखरेख और टीकाकरण का समय है और स्थानीय बाजार तक सीधी पहुंच है तो मुर्गी पालन करें. यदि आपके पास बजट कम है, जोखिम (Risk) नहीं लेना चाहते, दाने का खर्च बचाना चाहते हैं और कम मेहनत में 2-3 साल तक नियमित मुनाफा चाहते हैं तो बत्तख पालें. वहीं बतख पालन शुरू करने से पहले अपने स्थानीय बाजार में बतख के अंडे और मांस की मांग की जांच जरूर कर लें.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Leave a comment

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Related Articles

पोल्ट्री

Poultry News: बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग में साइंटिफिक तरीकों को अपनाने से मिलता है बेहतर उत्पादन

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग में बैकयार्ड पोल्ट्री फार्मिंग (Poultry Farming) कम बजट...

Vaccination reduces the use of antibiotics, hence reduce the AMR.
पोल्ट्री

Poultry: मुर्गियों को ट्रांसपोर्ट के लिए लोड करने से सबसे ज्यादा तनाव का सामना करना पड़ता है

नई दिल्ली. मुर्गियों को पकड़ने, लोड करने और ट्रांसपोर्ट के दौरान होने...

poultry farming
पोल्ट्री

Poultry: 4 मुर्गियों से शुरू करनें पोल्ट्री फार्मिंग, आगे चलकर खूब होगा मुनाफा

नई दिल्ली. क्या आप जानते हैं कि सिर्फ 4 देसी मुर्गियों से...

पोल्ट्री

Egg Production: मेरठ के अरकम अंडो के उत्पादन से हर दिन कमाते हैं 1.23 लाख रुपए

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग का बिजनेस न सिर्फ स्वरोजगार का जरिया है,...