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Animal Fodder: भैंस को खिलाएं ये दो किस्म का चारा, दूध प्रोडक्शन और क्वालिटी में होगी जबरदस्त ग्रोथ

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प्रतीकात्मक फोटो:

नई दिल्ली. अब भैंस की दूध उत्पादन क्षमता और क्वालिटी बढ़ाने के लिए किसानों को ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है. बस केंद्रीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान ग्रासलैंड के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किए गए चारे को खिलाकर ऐसा किया जा सकेगा. दरअसल इस संस्थान ने यूपी और एमपी के बुंदेलखंड इलाके में चारे की नई फसल को विकसित किया है. इन दोनों इलाकों में नई फसल के मुताबिक परिस्थिति है. जिस वजह से इसे तैयार किया गया है. कहा जा रहा है कि बरसीम और जई की उन्नत किस्म पशुओं के लिए बेहतर है. वहीं अब इन फसलों की डिमांड राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर होने लगी है.

ग्रासलैंड की सीड प्रोडक्शन यूनिट के नोडल अधिकारी डॉ. राजीव अग्रवाल ने बताया कि पशुपालकों को अपने मवेशियों को सामान्य तौर पर सीड और जई देसी किस्म का चारा खिलाते रहे हैं. हालांकि अब उन्हें दोनों चारे की हाइब्रिड किस्म खिलाने के लिए उपलब्ध करा दी गई है. यह दोनों किस्म इतनी बेहतरीन हैं कि इसे एनर्जी बूस्टर भी कहा जा सकता है. जो पशुओं को फायदा पहुंचाएंगी. इनके इस्तेमाल से मवेशियों के दूध में एसएनएफ का स्तर ज्यादा पाया गया है. आमतौर पर एसएनएफ की अधिकता वाले दूध से खोया और घी ज्यादा मात्रा में बनाया जा सकता है. यही वजह है कि यह चारा पशुपालकों के साथ-साथ दूध कारोबारी के लिए भी बेहतर है.

140 भैंसों पर किया गया प्रयोग
उन्होंने बताया कि इसका इस्तेमाल चारागाह में पाली गई भदवारी नस्ल की 140 भैंसे पर प्रयोग तौर पर किया गया था. जिसमें यह नतीजा सामने आया है कि समान्य चारा खाने वाली भैंसों की तुलना में हाइब्रिड बरसीम और जई खाने वाली भैंसे के मिल्क में फैट की मात्रा 8 फीसदी ज्यादा थी. इसके बाद हाइब्रिड बरसीम और जई किसानों का इस्तेमाल के लिए दी गई. जिसका फायदा मिल रहा है. उन्होंने बताया कि बेहतर रिजल्ट आने के बाद बड़ी कंपनियों ने ग्रेसलैंड से हाइब्रिड बरसीम और जई के बीज को खरीदने के लिए अनुबंध किया है. आने वाले समय अन्य कंपनियां भी करार कर सकती हैं.

कई देशों से आई है डिमांड
इसकी क्वालिटी को देखकर पशुपालकों और डेयरी कारोबारियों में इसकी मांग बढ़ रही है. जबकि कई डिमांड विदेश से भी आ रही है. यही वजह है कि संस्थान इन सब के साथ एक समझौता किया है. गुजरात की कंपनी आलमदार सीड्स और हैदराबाद की फॉरेजिन सीड्स भी इसी में शामिल है. यह कंपनियां ग्रेसलैंड से बीज खरीदेंगी और अपने फार्म में इसकी पौध तैयार करेंगी. अमेरिका, ऑस्ट्रिया, फिनलैंड, तुर्की सहित अन्य देशों को आपूर्ति करेंगी. करार में ये तय हुआ है कि कंपनियां अपनी पैकेजिंग पर कंपनी के नाम के साथ ग्रेसलैंड झांसी भी प्रिंट करेंगी. कंपनियों ने ग्रासलैंड से यह फोल्डर सीड्स विदेश में आपूर्ति करने के लिए सरकारी दाम से 20 फीसदी अधिक कीमत पर खरीदा है.

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