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Milk Production: 50 फीसद गांवों को दूध नेटवर्क से जोड़ेगी सरकार

हरित प्रदेश मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन सदस्यों को बोनस का तोहफा दिया जा रहा है.
प्रतीकात्मक फोटो. livestock animal news

नई दिल्ली. भारत दुनिया में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला देश है, लेकिन प्रति पशु उत्पादन क्षमता कम है. अगर प्रति पशु उत्पादन क्षमता भी बढ़ जाए तो भारत दुनिया में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने के मामले में और ज्यादा आगे चला जाएगा. वहीं मध्य प्रदेश भी इसी कड़ी में काम कर रहा है. मध्य प्रदेश की सरकार राज्य में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने का काम कर रही है. ताकि राज्य में दूध उत्पादन बढ़े और इसका फायदा पशुपालकों को भी मिले. इसके लिए सरकार की तरफ से कई योजनाएं भी शुरू की गईं हैं. जिसका फायदा भी मिल रहा है.

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की सरकार दूध उत्पादन को दोगुना से भी ज्यादा करना चाहती है. इस टारगेट को पूरा करने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री अक्सर कोशिश करने की बात कहते नजर आते हैं. ​सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार दुग्ध-उत्पादन बढ़ाने के लिए संकल्पबद्ध है. अभी दुग्ध-उत्पादन में प्रदेश तीसरे स्थान पर है, जो भविष्य में शीर्ष पर पहुंचेगा. इसी उद्देश्य से दुग्ध-उत्पादन में प्रदेश का योगदान 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें सहकारिता क्षेत्र की बड़ी भूमिका होगी.

हजारों दूध उत्पादकों को जोड़ा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की सरकार प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर किसानों और पशुपालकों की आर्थिक उन्नति के लिए प्रतिबद्ध है. प्रदेश के 50 प्रतिशत गांवों को दुग्ध नेटवर्क में लाने की रणनीति पर कार्य किया जा रहा है. सरकार की तरफ से नई 381 दुग्ध सहकारी समितियों का गठन कर 9500 दूध उत्पादकों को सहकारी डेयरी प्रणाली से जोड़ा गया है. जिसका फायदा पशुपालकों को मिल रहा है.

दूध संघों को मिले दूध के ज्यादा दाम
बता दें कि देश के दूध संघों में न सिर्फ दुग्ध संग्रहण बढ़ रहा है, बल्कि किसानों और दुग्ध उत्पादकों का हित भी सुनिश्चित हो रहा है. दूध संघों में दूध दामों में ढाई रुपए से लेकर छह रुपए तक प्रति लीटर वृद्धि का कार्य किया है. प्रदेश में दो दूध संघों जबलपुर और ग्वालियर में दुग्ध संग्रहण में उललेखनीय वृद्धि हुई है. जबलपुर और ग्वालियर दुग्ध संघ को दुग्ध उत्पादकों के लंबित भुगतान के लिए दो-दो करोड़ रुपए की कार्यशील पूंजी उपलब्ध करवाई गई है. इसके परिपालन में राज्य में दुग्ध उत्पादन की 72 प्रतिशत संभावित क्षमता को कवर करने और बाजार पहुंच को 15 प्रतिशत बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है.

Written by
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