Home मछली पालन Fish Farming: मछली की तेजी से ग्रोथ के लिए इन 6 तरीकों को अपनाएं मछली किसान
मछली पालन

Fish Farming: मछली की तेजी से ग्रोथ के लिए इन 6 तरीकों को अपनाएं मछली किसान

मछली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो पूरे मछली के बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
तालाब में पाली गई मछली की तस्वीर.

नई दिल्ली. मछली पालन एक बेहतरीन व्यवसाय है. इसको करके अच्छी कमाई हो सकती है. मछली की ग्रोथ अच्छी हो और उत्पादन भी बेहतर हो तो इसके लिए एक एकड़ के तालाब से सालाना पांच लाख रुपये तक की कमाई की जा सकती है. सरकार भी नीली क्रांति के जरिए मछली पालन को बढ़ावा देने का काम कर रही है. ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों की आय को बढ़ाया जा सके. सरकार का मनना है कि पशुपालन के अलावा किसान मछली पालन में भी हाथ आजमाएं तो उन्हें ज्यादा फायदा होगा और बहुत से गरीब तबके के लोगों में मछली के जरिए पोषण की कमी को भी दूर किया जा सकता है.

एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि मछलियों की ज़्यादा ग्रोथ हासिल करने के लिए बबसे जरूरी काम ये है कि उन्हें 30 से 35 प्रतिशत प्रोटीन वाला आहार देना चाहिए. इससे मछलियों की ग्रोथ तेजी के साथ होती है. अब सवाल ये है कि प्रोटीन वाले फीड के तौर पर मछलियों को क्या दिया जाए? तो इसका जवाब है धान के कुंडे या खली. इन फीड का इस्तेमाल करके मछलियों की ग्रोथ को बढ़ाया जा सकता है.

यहां पढ़ें फीड खिलाने का तरीका
-तालाब में पाली जाने वाली मछलियों की ग्रोथ का पता लगाने के लिए हर महीने मछलियों का वजन करना चाहिए और अगर वजन कम है तो उसके हिसाब से फीड की मात्रा में इजाफा करना चाहिए. इसे मछलियों की ग्रोथ अच्छी होगी.

-मछलियों को खिलाने का तरीका भी उनकी प्रजाति के मुताबिक होना चाहिए. जैसे तिलापिया छोटे-छोटे और लगातार भोजन करना पसंद करती है. जबकि ट्राउट एक दिन में एक बार ही भोजन खाना पसंद करती है. इसलिए इस बात का ध्यान देते हुए मछलियों को भोजन देना चाहिए.

-मछलियों को खिलाने का तरीका पानी के तापमान पर भी काफी हद तक डिपेंड होता है. पानी ठंडा होने पर या नॉर्मल स्तर का होने पर खिलाने की फ्रिक्वेंसी कम कर देनी चाहिए.

-नेचुरल फीड हमेशा ही मछलियों की ग्रोथ के लिए बेहतरीन साबित होती है. एक्सपर्ट भी कहते हैं कि मछलियों को प्राकृतिक भोजन सोर्स का इस्तेमाल करने देना चाहिए.

-मछलियों का मुख्य भोजन प्लैंकटन होता है. तालाब में इसकी मात्रा बढ़ाएं रखने के लिए उर्वरक का इस्तेमाल करना बेहतर होता है. अगर आप चाहें तो मवेशियों का मल मूत्र, तैरते बत्तख की बीट और सड़ी-गली पत्तियां इसके इस्तेमाल में ले सकते हैं.

-वही मछलियों को गाय-भैंस या किसी भी जानवर का गोबर खिलाया जा सकता है. गाय और भैंस के गोबर को सीधे तालाब में डाला जाता है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

shrimp farming problems
मछली पालन

Fisheries: टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से भीमावरम फिशरीज क्लस्टर होगा मजबूत

नई दिल्ली. नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. बिजय...

The States and UTs have been advised to implement the clusters based approach for development of fisheries and aquaculture. Based on the request received from the Andaman and Nicobar Administration, development of Tuna fisheries cluster in Andaman & Nicobar Islands has been notified under PMMSY.
मछली पालन

Fisheries: आंध्र प्रदेश ने 64 लाख टन मछली उत्पादन कर टारगेट किया पूरा

नई दिल्ली. भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के...

यहां मानसून जून से सितम्बर तक चलता है. औसत वर्षा करीब 57 सेमी. होती है.
मछली पालन

PMMSY के तहत हरियाणा में फिशरीज सेक्टर हुआ मजबूत

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) एक ऐसी योजना है, जिसके...