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Fisheries: गहरे समुद्र में फिशरीज को बढ़ावा देने और निर्यात सुधार के लिए ओडिशा सरकार ने किए कई काम

‘Need national guideline on eco-labeling of marine fishery resources’
Symbolic photo. livestock animal news

नई दिल्ली. ओडिशा सरकार की ओर से बताया गया है कि राज्य में गहरे समुद्र में मत्स्यन, मूल्य संवर्धन और निर्यात में सुधार करने के लिए उपाय किए गए हैं, ताकि इसका फायदा फिशरीज सेक्टर से जुड़े लोगों को सीधे तौर पर मिल सके. पीएमएमएसवाई और मुख्यमंत्री कृषि उद्योग योजना (एमकेयूवाई) के तहत वित्तीय सहायता के साथ गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों (डीएसएफवी) को बढ़ावा देने का काम सरकार की तरु से किया जा रहा है. वहीं अपतटीय मत्स्यन, आधुनिक मत्स्यन प्रौद्योगिकियों, टूना मत्स्यपालन, मेरीकल्चर और नीली अर्थव्यवस्था पहलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य गहरे समुद्र मत्स्यन मिशन (2026-2036) की शुरुआत की गई है.

कटाई के बाद नुकसान कम करने और बाजार पहुंच बेहतर बनाने के लिए पीएमएमएसवाई के तहत मछली पकड़ने के बंदरगाहों, मछली उतरान केंद्रों, बर्फ संयंत्रों, कोल्ड स्टोरेज, इंसुलेटेड व रेफ्रिजरेटेड परिवहन वाहनों और मछली कियोस्क का विकास व आधुनिकीकरण, स्वच्छ मछली प्रबंधन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग तथा कोल्ड चेन अवसंरचना को मजबूत करने के माध्यम से मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना, गहरे समुद्र में मत्स्यन तकनीकों और जहाज पर मछली प्रबंधन की व्यवस्था की गई है.

टीईडी को दिया जा रहा है बढ़ावा
इसके अलावा नौवहन, समुद्र में सुरक्षा और टिकाऊ मत्स्यन प्रथाओं पर मछुआरों का क्षमता निर्माण व प्रशिक्षण, सुरक्षा, निगरानी और नियामक अनुपालन बढ़ाने हेतु मशीनीकृत मछली पकड़ने वाले जहाजों में ट्रांसपोंडर-आधारित पोत निगरानी प्रणाली (वीएमएस) की स्थापना की गई है.

टिकाऊ समुद्री मत्स्य प्रबंधन के लिए कछुआ बहिष्करण उपकरणों (टीईडी) और अन्य जिम्मेदार मत्स्यन प्रथाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है.

वहीं समुद्री मछली और मत्स्य उत्पादों की निर्यात में सुधार के लिए एमपीईडीए, एनएफडीबी और राज्य मत्स्य पालन विभाग जैसी एजेंसियों के समन्वय से बाजार संपर्क और निर्यात-उन्मुख मत्स्य अवसंरचना की सुविधा दी गई है.

ओडिशा सरकार ने यह भी बताया है कि उन्होंने अधिसूचना संख्या 7034 दिनांक 16.03.2024 के माध्यम से छत्र योजना मुख्यमंत्री मत्स्यजीवी कल्याण योजना (एमएमकेवाई) के तहत एक घटक के रूप में “जलीय कृषि और झींगा निर्यात प्रकोष्ठ को बढ़ावा देना” आरंभ किया है.

इस घटक के तहत, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए संयंत्र व मशीनरी की खरीद और स्थापना हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.

जिसमें सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों के लिए 30% (3.5 करोड़ रुपये तक) तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, दिव्यांगजनों और पात्र पेशेवर रूप से योग्य लाभार्थियों के लिए 35% (4.0 करोड़ रुपये तक) की सब्सिडी सहायता शामिल है.

ओडिशा सरकार ने आगे बताया है कि झींगा उत्पादन को बढ़ावा देने और राज्य की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए अंतर्देशीय खारे पानी में सफेद पैर वाले झींगा (व्हाइट-लेग श्रिम्प) की खेती के लिए काम किया गया है.

इसके लिए एक पृथक नियामक ढांचा अधिसूचना संख्या 12770 दिनांक 13.07.2026 के माध्यम से अधिसूचित किया गया है.

Written by
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