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Fisheries: मछली पकड़ने के बंदरगाहों, मछली उतरान केंद्रों, कोल्ड चेन सुविधाओं को किया जा रहा मजबूत

fish farming in pond
तालाब में मछलियों की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार, वित्तीय वर्ष 2020-21 से अब तक ओडिशा राज्य सहित सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों में मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए कुल 20 हजार 750 करोड़ रुपये के खर्च के साथ प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) को संचालित कर रहा है. यह योजना, अन्य बातों के साथ-साथ, मछली पकड़ने के बंदरगाहों, मछली उतरान केंद्रों, कोल्ड चेन सुविधाओं और अन्य समुद्री मत्स्य अवसंरचना जैसे मत्स्य विकास अवसंरचना के विकास का प्रावधान करती है. मत्स्य पालन विभाग, भारत सरकार ने ओडिशा राज्य के लिए 416.84 करोड़ रुपये के केंद्रीय हिस्से सहित 1086.51 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है.

विभाग ने पीएमएमएसवाई के केंद्रीय क्षेत्र घटक के तहत 108.91 करोड़ रुपये की कुल लागत से पारादीप मत्स्य बंदरगाह के आधुनिकीकरण को भी मंजूरी दी है. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का मत्स्य पालन विभाग वर्ष 2018-19 से मत्स्य क्षेत्र की अवसंरचना आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मत्स्य पालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (एफआईडीएफ) को भी क्रियान्वित कर रहा है.

784 करोड़ की परियोजना को दी मंजूरी
एफआईडीएफ के तहत, भारत सरकार स्वीकार्य परियोजना लागत पर 3 फीसद तक की ब्याज सहायता प्रदान करती है.

इस योजना के तहत, विभाग ने अब तक ओडिशा में मछली पकड़ने के बंदरगाहों, मछली उतरान केंद्रों, मछली प्रसंस्करण इकाइयों और मछली बाजारों सहित 13 मत्स्य अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी है.

इसके कुल 784.32 करोड़ रुपये की परियोजना लागत पर मंजूरी दी है. जिसमें से 286.39 करोड़ रुपये की परियोजना लागत ब्याज सहायता हेतु पात्र है.

ओडिशा राज्य में एफआईडीएफ के तहत स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण अनुबंध-II में दिया गया है.

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) श्रेणी से संबंधित सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े सक्रिय पारंपरिक समुद्री मछुआरा परिवारों को वार्षिक एकसमान मत्स्यन प्रतिबंध अवधि के दौरान आजीविका और पोषण सहायता प्रदान करती है.

इसके अलावा, पीएमएमएसवाई दुर्घटना बीमा, मछली पकड़ने की नौकाओं और जालों की खरीद, गहरे समुद्र में मत्स्यन के लिए मदद करती है.

वहीं मछली पकड़ने के जहाजों के उन्नयन, समुद्री पिंजरा पालन सहित मेरी कल्चर गतिविधियों, समुद्री शैवाल की खेती के लिए भी मदद दी जा रही है.

सजावटी मछली पालन और मोती की खेती, कृत्रिम चट्टानों की तैनाती, तथा आधुनिक व टिकाऊ मत्स्यन प्रथाओं को अपनाने हेतु प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसे हस्तक्षेपों के माध्यम से पारंपरिक समुद्री मछुआरों के कल्याण और आजीविका संवर्धन का भी समर्थन करती है.

इसके अतिरिक्त, ओडिशा सरकार ने बताया है कि एक राज्य क्षेत्र योजना, मुख्यमंत्री मत्स्यजीवी कल्याण योजना (एमएमकेवाई) के तहत, अधिसूचित मत्स्यन प्रतिबंध क्षेत्रों में रहने वाले समुद्री मछुआरों की आजीविका का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा.

नुकसान की भरपाई और सहायता के लिए 1 नवंबर से 31 मई तक की वार्षिक कछुआ संरक्षण मत्स्यन प्रतिबंध अवधि के दौरान प्रत्येक पात्र समुद्री मछुआरा परिवार को 15,000 रुपये की आजीविका सहायता प्रदान की जाती है.

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