Home मछली पालन Fisheries: मछली पालन का ये तरीका है बेहद अच्छा और सस्ता, अपनाया तो होगी मोटी कमाई
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Fisheries: मछली पालन का ये तरीका है बेहद अच्छा और सस्ता, अपनाया तो होगी मोटी कमाई

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. खेती किसानी के अलावा मछली पालन भी एक बेहतरीन कारोबार है. इसको अपना कर किसान अच्छी कमाई रहे हैं. खासकर युवाओं में और किसानों में मछली पालन का क्रेज बढ़ता जा रहा है. क्योंकि मछली की मांग मार्केट में बढ़ रही है और डॉक्टर भी लोगों को मछली खाने की सलाह देते हैं. ऐसे में मछली पालन का बिजनेस करके अच्छा खासा फायदा उठाया जा सकता है. मछली पालन तालाब और टैंक में किया जाता है. मछली पालन को और ज्यादा फायदेमंद बनाने के लिए नई-नई तकनीक आती रहती है. अगर आप भी मछली पालन कर रहे हैं तो यहां एक देसी जुगाड़ के बारे में बताया जा रहा है, जिससे कम खर्च में मछली पालन करके आप मोटी कमाई कर सकते हैं.

क्या है बायोफ्लॉक तकनीक
बायोफ्लॉक तकनीक में बायोफ्लॉक नामक बैक्टीरिया का उपयोग किया जाता है. इस तकनीक से सबसे पहले मछलियों को सीमेंट या मोटी पॉलिथीन से बने टैंक में डाल दिया जाता है. इसके बाद मछली को वही भोजन दिया जाता है जो सामान्यता देना चाहिए. मछलियां अपने भोजन का 75% हिस्सा मल के रूप में शरीर से बाहर निकाल देती हैं. फिर बायोफ्लॉक बैक्टीरिया इस मल को प्रोटीन में बदलने का काम कर देता हैं. जिससे मछलियां खाती हैं और इसी से मछलियों का विकास बहुत तेजी के साथ होता है.

बहुत कम है लागत
एक्सपर्ट कहते हैं कि बायोफ्लॉक तकनीक के कई फायदे हैं. सबसे पहला फायदा ये है कि कम लागत और जगह पर इससे अधिक उत्पादन कमाया जा सकता है. 4 महीने में केवल एक ही बार पानी भरना पड़ता है. गंदगी जमने पर सिर्फ 10% पानी बाहर निकाल कर टैंक को साफ करने की जरूरत होती है. वहीं अनुपयोगी जगह और कम पानी की आवश्यकता होती है. जबकि मजदूरों की लागत भी नहीं लगती है.

इस तरह करें मछली पालन
अगर आप भी मछली पालन करना चाहते हैं तो इस तकनीक से सीमेंट या मोटी पॉलिथीन से बने टैंक में मछली को पाल सकते हैं. प्लास्टिक कंटेनर का इस्तेमाल करके मछली को पाल सकते हैं. या काफी सस्ता और फायदेमंद सौदा है. आपको बता दें कि देसी जुगाड़ में कुल खर्च 550 रुपए का आएगा. किसान इससे लाखों का मुनाफा कमा सकते हैं. प्लास्टिक कंटेनर में मोटी पॉलिथीन लगाकर उसमें पानी भर दिया जाता है. जिसके बाद इसमें आसानी से मछली पाला जा सकता है. यह तरीका बेहद आसान और कम खर्च करने वाला है.

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